@vikram-vairagi
Vikram Gaur Vairagi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vikram Gaur Vairagi's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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वरना तो बेवफ़ाई किसे कब मुआफ़ है
तू मेरी जान है सो तुझे सब मुआफ़ है
क्यों पूछती हो मैंने तुम्हें माफ़ कर दिया
ख़ामोश हो गया हूँ मैं मतलब मुआफ़ है
चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे
बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे
इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे
ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
जहान भर में न हो मयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना
नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना
कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों
लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना
मौत वो है जो आए सजदे में
ज़िन्दगी वो जो बंदगी हो जाए
क्या कहूँ आप कितने प्यारे हैं
इतने प्यारे कि प्यार ही हो जाए
हम हैं ना! ये जो मुझसे कहते हैं
ख़ुद किसी और के भरोसे हैं
ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ
ख़ुदकुशी के तो सौ तरीक़े हैं
इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए
जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
सच बताओ कि सच यही है क्या
साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या
कुछ नया काम कर नई लड़की
इश्क़ करना है बावली है क्या
ये बात अभी सबको समझ आई नहीं है
दीवाना है दीवाना तमन्नाई नहीं है
दिल मेरा दुखाकर ये मुझे तेरा मनाना
मरहम है फ़क़त ज़ख्म की भरपाई नहीं है
मैं भूल चुका हूँ कि ये वनवास है वन है
इस वक़्त मेरे सामने सोने का हिरन है
मैं ध्यान से कुछ सुन ही नहीं पाऊँगा सरकार
मैं क्या ही बताऊँ कि मेरा ध्यान मगन है
यूँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का
सलीके से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता
कुछ रिश्तों में दिल को आज़ादी नइँ होती
कुछ कमरों में रौशनदान नहीं होता है
मैं अपनी हिजरत का हाल लगभग बता चुका था सभी को और बस
तिरे मोहल्ले के सारे लड़के हवा बनाने में लग गए थे
मिरे सीने पे सर रक्खा है तो ख़ामोश मत रह
मुझे बतला तुझे जो भी सुनाई दे रहा है
इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी
ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी