वरना तो बेवफ़ाई किसे कब मुआफ़ है
तू मेरी जान है सो तुझे सब मुआफ़ है
क्यों पूछती हो मैंने तुम्हें माफ़ कर दिया
ख़ामोश हो गया हूँ मैं मतलब मुआफ़ है
चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे
बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे
इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे
ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
जहान भर में न हो मयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना
नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना
कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों
लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना
मौत वो है जो आए सजदे में
ज़िन्दगी वो जो बंदगी हो जाए
क्या कहूँ आप कितने प्यारे हैं
इतने प्यारे कि प्यार ही हो जाए
सच बताओ कि सच यही है क्या
साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या
कुछ नया काम कर नई लड़की
इश्क़ करना है बावली है क्या
कभी मिलेंगे तो ये कर्ज़ भी उतारेंगे
तुम्हारे चेहरे को पहरों तलक निहारेंगे
ये क्या सितम कि खिलाड़ी बदल दिया उसने
हम इस उमीद पे बैठे थे हम ही हारेंगे
हमारे बाद तेरे इश्क़ में नए लड़के
बदन तो चूमेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
मुझे अँधेरे से बात करनी है सो करा दो, दिया बुझा दो
कुछ एक लम्हों को रौशनी का गला दबा दो, दिया बुझा दो
रिवाज़-ए-महफ़िल निभा रहा हूँ बता रहा हूँ मैं जा रहा हूँ
मुझे विदा दो, जो रोना चाहे उन्हें बुला दो, दिया बुझा दो
उनकी सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे
हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे
ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें
प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
हमारे बाद तेरे इश्क़ में नए लड़के
बदन तो चूमेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे