
मैं भूल चुका हूँ कि ये वनवास है वन है
इस वक़्त मेरे सामने सोने का हिरन है
मैं ध्यान से कुछ सुन ही नहीं पाऊँगा सरकार
मैं क्या ही बताऊँ कि मेरा ध्यान मगन है
— Vikram Gaur Vairagi
Other sher from the same pen
Shers of politics.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling