Politics Shayari - Poetic Verses Reflecting Power and Society

Discover a compelling collection of Politics Shayari that delves into the intricacies of political power, governance, and societal dynamics. These poetic lines critique, inspire, and reflect the realities of politics and its impact on people.

Best Politics Shayari on Power and Society

मुक़ाबिल फ़ासलों से ही मोहब्बत डूब जाएगी
सुनोगी झूठी बातें तुम हक़ीक़त डूब जाएगी

चलेगी तब तलक जब तक तिरी परछाईं देखेगी
तिरा जब हुस्न देखेगी सियासत डूब जाएगी
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Anurag Pandey
मैं भूल चुका हूँ कि ये वनवास है वन है
इस वक़्त मेरे सामने सोने का हिरन है

मैं ध्यान से कुछ सुन ही नहीं पाऊँगा सरकार
मैं क्या ही बताऊँ कि मेरा ध्यान मगन है
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Vikram Gaur Vairagi
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पूँजी वालों की है चाँदी
बेचारी जनता फर्ज़ी है

जो चाहे वो बिल लें आए
संसद की मन मर्ज़ी है
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Kush Pandey ' Saarang '
दोस्ती ऐसे निभाओ
वक़्त रहते काम आओ

ज़िन्दगी में ग़म हैं माना
ग़म छुपाकर मुस्कुराओ

दोस्त हो या कोई दुश्मन
सबको सीने से लगाओ

सो रही है जनता सारी
नींद से इनको जगाओ

बेच देंगे ये लुटेरे
देश को इनसे बचाओ

अम्न का नारा नहीं बस
दूरियाँ भी तो मिटाओ

क्यूँ न होगा नाम ऊँचा
काम ऊँचा कर दिखाओ
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Kumar Aryan
चाँद तारे और सूरज जा रहे हड़ताल पर
मांग है सरकार से इतवार होना चाहिए
Saarthi Baidyanath

Heart Touching Politics Shayari in Hindi

भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो
कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अशआर कहते थे
Siddharth Saaz
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ऐसा नहीं बस आज तुझे प्यार करेंगे
ताउम्र यही काम लगातार करेंगे

सरकार करेगी नहीं इस देश का उद्धार
उद्धार करेंगे तो कलाकार करेंगे
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Tanoj Dadhich
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एकलव्यों के अँगूठे, काटने का
वो सियासी खेल अब भी चल रहा है
Umesh Maurya
सफारी में नेता चलेंगे समझिए
हैं जनता-जनार्दन तो पीछे ही चलिए
Kush Pandey ' Saarang '
मकाँ मालिक किराएदार बन जाते
किराएदार जब सरकार बन जाते

ये जनता राज में ही ख़ासियत है बस
कि अपराधी यहाँ सरदार बन जाते
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Jagveer Singh

Emotional Politics Shayari on Leadership and People

सियासत के चेहरे पे रौनक़ नहीं
ये औरत हमेशा की बीमार है
Shakeel Jamali
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इस दौर-ए-सियासत का इतना सा फ़साना है
बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है
Unknown
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ख़ुद से नहीं झुकती है अगर ख़ुद से झुका दो
नाकाम ये सरकार, ये सरकार गिरा दो
Mohit Subran
यार उसकी शराफ़त में देखो ज़रा
बिक चुका हूँ मुहब्बत में देखो ज़रा

रंग लोगों ने बदला यहाँ किस तरह
इश्क़ की इस सियासत में देखो ज़रा
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Shayar Danish
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ये आपकी सरकार है
क्या ही कहूँ, धिक्कार है
Lekhak Suyash

Beautiful Politics Shayari in Urdu

वो हिंदू, मैं मुस्लिम, ये सिक्ख, वो ईसाई
यार ये सब सियासत है चलो इश्क़ करें
Rahat Indori
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हमारे ख़ौफ़ से बाज़ार उछलते हैं जहां भर में
सिसकने से हमारे कौन सी सरकार गिरती है
Nomaan Shauque
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मोहब्बत में भी सियासत हो जाए
अगर इसमें भी रियासत हो जाए
Meem Alif Shaz
चल रही जुमलों से अब सरकार ही है
सबको तो मेहनत की अब दरकार ही है

तुम नहीं यारो परखना वक़्त को तो
वक़्त के आगे तो सब बेकार ही है
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Ajay Kishor
वफ़ा से सबका दिल अब उठ रहा है
वफ़ा मानो सियासत हो गई है
Mohd Arham

Short Politics Shayari for Instagram Captions

उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे
Jigar Moradabadi
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सजा दूँ मांँग मैं तेरी लहू से आज मैं अपने
बुरा मानो अगर मेरे न तुम सरकार, होली में
Shashank Shekhar Pathak
झूठा इक किरदार निभाने आए हैं
अपना ही दरबार सजाने आए हैं

जिनकी चलती नही घरों में ख़ुद की भी
वो भी अब सरकार बनाने आए हैं
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Naimish trivedi
कभी मुफ़लिस की बस्ती से गुज़र कर देख इक बारी
सियासत में यहाँ अब कौन कहता छल नहीं होगा
Sandeep dabral 'sendy'
मोहब्बत में सियासत हो नहीं सकती
कई रिश्ते मिटा कर जीत मिलती है
Tiwari Jitendra

Poetic Politics Shayari on Corruption and Justice

ले लो बोसा अपना वापस किस लिए तकरार की
क्या कोई जागीर हम ने छीन ली सरकार की
Akbar Merathi
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बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़'
डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम
Asrar Ul Haq Majaz
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बचे हैं काँच अब भी खिड़कियों के
यही मतलब है जनता सो रही है
Umesh Maurya
सियासत हो रही है धर्म पर ही
नहीं तो धर्म का ये रूप है क्या
Umesh Maurya
अच्छे दिन लाएगा यक़ीं है मुझे
वो सियासी नहीं ख़ुदा है दोस्त
Dharmesh Solanki

Politics Shayari on Social Change and Unity

मुल्क तो मुल्क घरों पर भी है क़ब्ज़ा उस का
अब तो घर भी नहीं चलते हैं सियासत के बग़ैर
Zia Zameer
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मुहब्बत में हमने सियासत न की
तभी इश्क़ में कोई बरकत न की

उसे मानता था मैं अपना ख़ुदा
कभी उसकी लेकिन इबादत न की
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RAJAT AWASTHI
बेदर्द सियासत ने ज़हनों पर कैसा पर्दा डाल दिया
हम डूब रहे हैं दलदल में और देख रहे आतिशबाज़ी
Amaan Javed
जब वोट के दिन थे तब वे रोज़ ही दिखते थे
इक साल हुआ तो अब इक बार नहीं दिखते
Sahil Verma
सियासी जो परचम उठाए हुए हो
मियाँ ख़ुद को क्या तुम बनाए हुए हो

वही तो नही सुन रहा बात तेरी
जिसे वोट देकर जिताए हुए हो
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Kush Pandey ' Saarang '

Thoughtful Politics Shayari on Democracy and Freedom

दीवार उठाने की तिजारत नहीं आई
दिल्ली में रहे और सियासत नहीं आई

बिकने को तो दिल बिक गया बाज़ार में लेकिन
जो आप बताते थे वो क़ीमत नहीं आई
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Obaid Azam Azmi
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कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना
एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना

जिस को तुम चाहो कोई और न चाहे उस को
इस को कहते हैं मोहब्बत में सियासत करना
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Liaqat Jafri
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चुप रहेंगे या कहेंगे और तो ग़म क्या सहेंगे
रक्त अपनों के बहेंगे और मरहम क्या लगेंगे

जानते हैं वो सियासत के बड़े उम्दा खिलाड़ी
पर मुक़ाबिल पा हमें पूछेंगे "अब हम क्या करेंगे
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Zain Aalamgir
बड़ा होकर जो छोटे लोगों की ताज़ीम करता है
ज़माना ऐसे ही इंसान को तसलीम करता है

चलो छोड़ो सियासत के पुराने ताने बाने को
यही वो फ़लसफ़ा है जो हमे तक़्सीम करता है
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Abdulla Asif
आवाज़ इक अपने रविश पर आ गया
सरकार को भी यार चक्कर आ गया

बिकने लगी ईमानदारी शख़्स की
हिस्से मिरे आँसू तिरे ज़र आ गया
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Shubham Rai 'shubh'

Inspirational Politics Shayari on Patriotism and Governance

इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले
ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले
Nadim Nadeem
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
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Anand Raj Singh
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शहर और बस्ती जलाती है सियासत आज भी
रहनुमा तक़सीम करते हैं अदावत आज भी

हम शिकायत ज़ुल्म की कैसे करें किस से करें
खा रही है हक़ ग़रीबों का हुकूमत आज भी
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Shajar Abbas
ज़रा सोचो कि मेरा दिल
सभी का है, सियासत है
"Nadeem khan' Kaavish"
हमेशा मैं ही समझौता करूंँ क्या
मुहब्बत क्या सियासत थी,नहीं ना
"Nadeem khan' Kaavish"

Politics Shayari on Responsibility and Progress

दो मुल्कों के सियासी खेल में जाने
यहाँ पर कितनों के घर उजड़े हैं मौला

वही हर सुब्ह मंज़र देखना पड़ता
हज़ारों लोग यूँ ही मरते हैं मौला
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Harsh saxena
जो सियासत यहाँ पे करते हैं
देशद्रोही हैं देश पाल कहाँ
Navneet krishna
ख़ुदा जाने वो ऐसे कैसे क्यों ये मर्द पाले हैं
सियासी लोग अपने दल में दहशतगर्द पाले हैं

किया करते हैं जो ज़ुल्म-ओ-सितम हर बेबसों पर यूँ
वो अपने आस्तीनों में फ़क़त बे-दर्द पाले हैं
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Shayar Danish
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हम तो ग़म पर हंस दिए हां आंखें हुई थी नम
मौला शुक्र है आंखों को सियासत नही आई
Parwez Akhtar
इशारा है सियासत पर अभी बातें नहीं करनी
अगर हम भी रहे ख़ामोश तो क्या मुल्क का होगा
sahil