
शहर और बस्ती जलाती है सियासत आज भी
रहनुमा तक़सीम करते हैं अदावत आज भी
हम शिकायत ज़ुल्म की कैसे करें किस से करें
खा रही है हक़ ग़रीबों का हुकूमत आज भी
— Shajar Abbas
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