Jaun Elia

Jaun Elia

@jaun-elia

Explore the poetic brilliance of renowned Pakistani poet Jaun Elia, featuring a diverse collection of sher, ghazal, and nazm in both Hindi and English. Delve into his genius and save your cherished verses.

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Shayari
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  • Ghazal
  • Nazm
मुस्कुराए हम उस से मिलते वक़्त
रो न पड़ते अगर ख़ुशी होती
Jaun Elia
रह-गुज़र-ए-ख़याल में दोश-ब-दोश थे जो लोग
वक़्त की गर्द-बाद में जाने कहाँ बिखर गए
Jaun Elia
जो रानाई निगाहों के लिए सामान-ए-जल्वा है
लिबास-ए-मुफ़्लिसी में कितनी बे-क़ीमत नज़र आती

यहाँ तो जाज़बिय्यत भी है दौलत ही की पर्वर्दा
ये लड़की फ़ाक़ा-कश होती तो बद-सूरत नज़र आती
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Jaun Elia
वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था
आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे
Jaun Elia
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अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूँ
ख़ून भी थूका सच-मुच थूका और ये सब चालाकी थी
Jaun Elia
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अहद-ए-रफ़ाक़त ठीक है लेकिन मुझ को ऐसा लगता है
तुम तो मेरे साथ रहोगी मैं तन्हा रह जाऊँगा
Jaun Elia
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अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
Jaun Elia
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कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में
दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है

जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत
हुस्न दौलत का साथ देता है
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Jaun Elia
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मुझ से अब लोग कम ही मिलते हैं
यूँ भी मैं हट गया हूँ मंज़र से
Jaun Elia
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं
ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए

पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं
जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
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Jaun Elia
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जौन' उठता है यूँ कहो या'नी
'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
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किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे
आप मिलते नहीं हैं क्या कीजे
Jaun Elia
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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उस के होंटों पे रख के होंट अपने
बात ही हम तमाम कर रहे हैं
Jaun Elia
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ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को
बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं
Jaun Elia
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम
अब भी तुम मुझको जानती हो क्या
Jaun Elia
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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
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Jaun Elia
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी
यूँ ही बातें बनाते हैं हम जी
Jaun Elia
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