vo jo na aane waala hai naa us se mujh ko matlab tha | वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था

  - Jaun Elia

वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था
आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे

  - Jaun Elia

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    किसी लिबास की खुशबू जब उड़ के आती है
    तेरे बदन की जुदाई बहुत सताती है

    तेरे गुलाब तरसते हैं तेरी खुशबू को
    तेरी सफ़ेद चमेली तुझे बुलाती है

    तेरे बग़ैर मुझे चैन कैसे पड़ता हैं
    मेरे बगैर तुझे नींद कैसे आती है
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    Jaun Elia
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    काम की बात मैं ने की ही नहीं
    ये मिरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं

    ऐ उमीद ऐ उमीद-ए-नौ-मैदां
    मुझ से मय्यत तिरी उठी ही नहीं

    मैं जो था उस गली का मस्त-ए-ख़िराम
    उस गली में मिरी चली ही नहीं

    ये सुना है कि मेरे कूच के बा'द
    उस की ख़ुश्बू कहीं बसी ही नहीं

    थी जो इक फ़ाख़्ता उदास उदास
    सुब्ह वो शाख़ से उड़ी ही नहीं

    मुझ में अब मेरा जी नहीं लगता
    और सितम ये कि मेरा जी ही नहीं

    वो जो रहती थी दिल-मोहल्ले में
    फिर वो लड़की मुझे मिली ही नहीं

    जाइए और ख़ाक उड़ाइए आप
    अब वो घर क्या कि वो गली ही नहीं

    हाए वो शौक़ जो नहीं था कभी
    हाए वो ज़िंदगी जो थी ही नहीं
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    Jaun Elia
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    ये कुछ आसान तो नहीं है कि हम
    रूठते अब भी हैं मुरव्वत में!
    Jaun Elia
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    ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं
    शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं

    हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद
    देखने वाले हाथ मलते हैं

    है वो जान अब हर एक महफ़िल की
    हम भी अब घर से कम निकलते हैं

    क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
    जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं

    है उसे दूर का सफ़र दर-पेश
    हम सँभाले नहीं सँभलते हैं

    तुम बनो रंग तुम बनो ख़ुश्बू
    हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं

    मैं उसी तरह तो बहलता हूँ
    और सब जिस तरह बहलते हैं

    है अजब फ़ैसले का सहरा भी
    चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं
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    Jaun Elia
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    सुब्ह तक वज्ह-ए-जाँ-कनी थी जो बात
    मैं उसे शाम ही को भूल गया
    Jaun Elia
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