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Waseem Barelvi

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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे।

मुशायरो की धड़कन और उर्दू अदब की शान है प्रो. वसीम बरेलवी। उन्होने हिन्दुस्तानी शायरी की सदियों की तहजीब की दस्तार की इज्जत को कभी कम नहीं होने दिया। वसीम बरेलवी का नाम ऐसे शायरो में शामिल है जिनकी शायरी मैं इंसानी जज्बात, जमाने के उतार चढ़ाव, खट्टे मीठे तजुर्बे शामिल है।

वसीम बरेलवी का जन्म 18 फरवरी 1940 को उत्तर प्रदेश के बरेली में जनाब शाहिद हसन नसीम मुरादाबादी के यहां हुआ। उनके पूर्वज मुरादाबाद के बहुत बड़े ज़मीनदार थे। ऐसा कहा जाता है कि उस समय 384 गांव उनके अधीन थे। उनका वास्तविक नाम ज़ाहिद हसन वसीम है । वसीम बरेलवी बहुत ही कम उम्र में कविता की ओर आकर्षित हो गए थे। उनके पिता ने जब वसीम बरेलवी 6 वीं कक्षा में थे तब उनके कुछ शेर जिगर मुरादाबादी और रईस अमरोही को सुना दिए थे।

वसीम बरेलवी ने अधिकांश शिक्षा बरेली में प्राप्त की। बरेली कॉलेज से उर्दू साहित्य में परास्नातक करने के बाद, उन्होंने वहां उर्दू साहित्य की पढ़ाई शुरू कर दी। उसके बाद वह बरेली कॉलेज में उर्दू विभाग के एक सहायक प्रोफेसर और उर्दू के हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट बन गए। वसीम बरेलवी के लेखन में अमीर खुसरो, कबीर, रसखान की झलक साफ नजर आती है।
वसीम बरेलवी सलीके का दूसरा नाम है। यह बात उनकी शायरी ये साफ जाहिर होती हैं।

कौन-सी बात कहाँ, कैसे कही जाती है
ये सलीक़ा हो, तो हर बात सुनी जाती है
एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने
कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है।

वसीम साहब शायरी के जरिए हिंदुस्तान को जोड़ने और उर्दू को मोहब्बत के जरिए लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे है। इनके कलाम को जगजीत सिंह ने भी अपनी खूबसूरत आवाज से नवाजा है। जैसे

आते आते मेरा नाम सा रह गया,
उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया।

यहां तक फ़िराक़ गोरखपुरी ने भी कहा है कि मेरा महबूब शायर वसीम बरेलवी है। मै उससे और उसके कलाम दोनो से मोहब्बत करता हूं।

उन्हें कई अनुकरणीय कविताओं के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।भारत सरकार द्वारा उन्हें उर्दू भाषा के प्रचार के लिए राष्ट्रीय परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है।

कविता संग्रह:
तब्बसुम-ए-ग़म(उर्दू) (1966)
आंसू मेरे दामन तेरा (हिंदी) (1990)
मिज़ाज (उर्दू) (1990)
आंख‌ आंसू हुई (उर्दू) (2000)
मेरा क्या (हिंदी) (2000)
आंखो आंखो रहे (उर्दू) (2007)
मौसम अंदर बाहर के (उर्दू) (2007)
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  • Ghazal
  • Nazm

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