अहद-ए-रफ़ाक़त ठीक है लेकिन मुझ को ऐसा लगता है

  - Jaun Elia

अहद-ए-रफ़ाक़त ठीक है लेकिन मुझ को ऐसा लगता है
तुम तो मेरे साथ रहोगी मैं तन्हा रह जाऊँगा

  - Jaun Elia

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    आदमी आदमी को भूल गया
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    अब तो ग़म भी गँवा चुका हूँ मैं
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    रो न पड़ते अगर ख़ुशी होती
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    मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास
    सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर
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    आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे
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