Vibha Jain 'Khwaab'

Vibha Jain 'Khwaab'

@vibha-jain-khwaab

Vibha Jain 'Khwaab' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vibha Jain 'Khwaab''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

क्यूँ कोई कोख जो सूनी हो वो शर्मिंदा हो क्या ज़रूरी है कि हर सीप से मोती निकले — Vibha Jain 'Khwaab'
भगवान जाने कैसे निबाहेंगे इस के साथ हम सादा दिल हैं और ज़माना बड़ा चतुर — Vibha Jain 'Khwaab'
फिर वही रात वही चाँद वही तुम वही मैं क्या किसी छत के मुक़द्दर में लिखे जाएँगे — Vibha Jain 'Khwaab'

Ghazal

ज़हर से ज़हर कटे काँटे से किरची निकले दे नया दर्द कि ये टीस पुरानी निकले ज़िंदगी यूँ तो नया लफ़्ज़ नहीं है लेकिन वक़्त के साथ नए इस के मआ'नी निकले क्यूँ कोई कोख जो सूनी हो वो शर्मिंदा हो क्या ज़रूरी है कि हर सीप से मोती निकले इश्क़ की झील में उतरो तो सँभल कर उतरो ऐन मुमकिन है ये उम्मीद से गहरी निकले एक वो शख़्स जिसे दिल ने ख़ुदा जाना हो सोचिए क्या हो अगर वो भी फ़रेबी निकले छटपटाते हैं उदासी से निकलने को मगर क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पँछी निकले वो तरीक़ा मुझे मरने का बताओ जिस से ख़ुद-कुशी भी न लगे जान भी जल्दी निकले — Vibha Jain 'Khwaab'
आँखों को हाए लग गई किस की नज़र निठुर सोएँ तो नींद लापता रोएँ तो अश्क फुर तेरे फ़िराक़ में ये मेरा हाल देख कर करने लगे हैं चाँद सितारे खुसुर-फुसुर ऐ दिल हिसार-ए-याद से बाहर निकल ज़रा बच्चों की तरह क्यूँँ किए जाता है ना-नुकुर यूँँ ही गुज़रती जाएगी तुम बिन ये ज़िंदगी यूँँ ही तवाफ़ करते रहेंगे माह-ओ-ख़ुर जैसे कि रू-ब-रू कोई बरसों के बा'द हो यूँँ तक रहा है आइना हम को टुकुर टुकुर भगवान जाने कैसे निबाहेंगे इस के साथ हम सादा दिल हैं और ज़माना बड़ा चतुर अपनी ही धुन में मस्त रहेंगे तमाम उम्र हम क्यूँँ मिलाएँ आप की दुनिया के सुर में सुर दिल में हज़ार दर्द उठे आँख तर न हो हम को भी ऐ 'अमीर' सीखा दे ज़रा ये गुर — Vibha Jain 'Khwaab'