Lekhak Suyash

Lekhak Suyash

@LekhakSuyash

Lekhak Suyash shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Lekhak Suyash's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तुम क्यूँ नहीं समझते मसरूफ़ियत मिरी बेकार बैठना भी तो कार ही हुआ — Lekhak Suyash
तुम बहारों में पले हो मैं ख़िज़ाँओं का ख़ुदा हूँ — Lekhak Suyash
मोहब्बत को इबादत मानता हूँ मैं ख़ुदा इंसाफ़ कर मेरी परस्तिश का — Lekhak Suyash
ये कार-ए-मुहाल कर लिया है अब ख़ुद को बहाल कर लिया है — Lekhak Suyash
वो आया नहीं है अयादत को भी मैं जिस को मसीहा समझता रहा — Lekhak Suyash
ग़ैरतों के मसअले थे ख़्वाब हम पर हँस रहे थे — Lekhak Suyash
नस्ल थे हम वो कि जिस ने गाँव तो देखे न थे शहर था इक वो भी अब तो जाँ-सिताँ सा हो गया — Lekhak Suyash
तुम को दर्द भी होता है क्या तुम ऐसे कैसे लड़के हो — Lekhak Suyash
दो आँखों से दुनिया अब कैसे दिखे हम दो आँखों में दुनिया देखते थे — Lekhak Suyash
या तो फ़ुर्क़त में निभा अहद-ए-वफ़ा या तो शौक़-ए-जिस्म का इक़रार कर — Lekhak Suyash
यूँँ साथ तो न जाने क्या-क्या नहीं चला हमराह पर वही था जो साथ थम सका — Lekhak Suyash
मैं ने जन्नत से हिजरत की थी जन्नत लगभग तेरे जैसी थी — Lekhak Suyash
इतनी तो अदावत का तुम को हक़ ही नइँ है इतनी तो तुम ने मुझ से मोहब्बत ही नइँ की — Lekhak Suyash
क्या करोगे बुलाकर ख़ुदा को वहाँ हो ज़रूरत अगर ना-ख़ुदा की जहाँ — Lekhak Suyash
ख़ुश-क़िस्मत था मरने वाला बद-क़िस्मत हूँ मैं ज़िंदा हूँ — Lekhak Suyash
हम को तो साथ में जीना है मरने के वादे कौन करे — Lekhak Suyash
इश्क़ नहीं मिलना है तुम को तुम दिल के अच्छे लड़के हो — Lekhak Suyash
मैं सोचता हूँ तुम को भुला दूँ पर सोचता हूँ फिर क्या करूँँगा — Lekhak Suyash

Ghazal

न हो उस तरफ़ रुख़ दुआ कीजिएगा वफ़ा की गली आप क्या कीजिएगा दुआ कीजिएगा तो ये याद रखना वफ़ा की दुआ को क़ज़ा कीजिएगा यूँँ कब तक पढ़ेंगे वफ़ा की दुआएँ किसी को वफ़ा भी अता कीजिएगा ये कैसी मोहब्बत सज़ा ही सज़ा है मोहब्बत हमें कब जज़ा कीजिएगा हमें इस क़फ़स में पड़ा रहने दीजे कि मर जाएँगे गर रिहा कीजिएगा मोहब्बत नसीबों में है क्या हमारे ख़ुदा क्या कभी मो'जिज़ा कीजिएगा हमें भी कभी वो नज़र भर के देखें हवाओं ज़रा रास्ता कीजिएगा न आसाँ कोई निकले हम सा यहाँ फिर जो क़ातिल से कह दे शिफ़ा कीजिएगा मोहब्बत को समझे तो समझा ये हम ने मोहब्बत समझ के भी क्या कीजिएगा — Lekhak Suyash
तू गया दिल हुआ सज़ा-ए-जाँ तू खुला हम पे बन बला-ए-जाँ कुछ न हासिल हमें तिरे बारे है मगर तू हमें मता-ए-जाँ तेरी आमद से फूल खिलते थे शहर ये अब है कर्बला-ए-जाँ जो कभी ख़्वाब थे तिरे दम से हो गए हैं वो मसअला-ए-जाँ तू गया तब से शहर है बिखरा ख़ाक में मिल गई अदा-ए-जाँ वो जो तेरी गली से आती थी वो हवा भी कि अब जलाए जाँ जब तिरा ग़म निकालने बैठे कुछ भी निकला नहीं सिवा-ए-जाँ ये ख़ला हम में क्यूँँ भरी तू ने मौत क्यूँँ दे गया ख़ुदा-ए-जाँ हम जो चुप हैं तो ये भी जुरअत है ताकि ज़िंदा रहे वफ़ा-ए-जाँ सब ने सोचा कि इश्क़ हारा है हम ने बोला कि है नफ़ा-ए-जाँ प्यार में हार कुछ नहीं होती प्यार होना ही है जज़ा-ए-जाँ ज़ख़्म गहरे सही मगर 'लेखक' जागती है कहीं दुआ-ए-जाँ — Lekhak Suyash

Nazm