Hasrat Shayari - Poetic Verses Reflecting Longing and Unfulfilled Desires

Explore a soulful collection of Hasrat Shayari that beautifully captures the emotions of longing, dreams, and unfulfilled desires. These poetic lines express the pain and beauty of aspirations yet to be realized.

Best Hasrat Shayari on Longing and Desires

tamanna shayari
कटती है आरज़ू के सहारे पे ज़िंदगी
कैसे कहूँ किसी की तमन्ना न चाहिए
Shaad Arfi
23 Likes
दिल-लगी में हसरत-ए-दिल कुछ निकल जाती तो है
बोसे ले लेते हैं हम दो-चार हँसते बोलते
Munshi Amirullah Tasleem
15 Likes
वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर
वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
15 Likes
हसरत भरी नज़र से तुझे देखता हूँ मैं
जिसको ये खल रहा है वो आँखों को फोड़ ले
Shajar Abbas
20 Likes
ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम
विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं
Faiz Ahmad Faiz
17 Likes

Heart Touching Hasrat Shayari in Hindi

नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर
Read Full
Asrar Ul Haq Majaz
13 Likes
नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
26 Likes
तुझ से सौ बार मिल चुके लेकिन
तुझ से मिलने की आरज़ू है वही
Jaleel Manikpuri
23 Likes
इक नई क़िस्म तलाशी गई है फूलों की
मेरी हसरत है उसे नाम तुम्हारा मिल जाए
Vishnu virat
25 Likes
हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
Waheed Quraishi
11 Likes

Emotional Hasrat Shayari on Love and Dreams

मिरी आरज़ू का हासिल तिरे लब की मुस्कुराहट
हैं क़ुबूल मुझ को सब ग़म तिरी इक ख़ुशी के बदले
Kashif Adeeb Makanpuri
31 Likes
शेर दर-अस्ल हैं वही 'हसरत'
सुनते ही दिल में जो उतर जाएँ
Hasrat Mohani
15 Likes
मुझे ये डर है तेरी आरज़ू न मिट जाए
बहुत दिनों से तबीअत मिरी उदास नहीं
Nasir Kazmi
15 Likes
ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
Akhtar Shirani
11 Likes
'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी
सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज
Hasrat Mohani
23 Likes

Beautiful Hasrat Shayari in Urdu

मैं कैसे मान लूँ कि इश्क़ बस इक बार होता है
तुझे जितनी दफ़ा देखूँ मुझे हर बार होता है

तुझे पाने की हसरत और डर ना-कामियाबी का
इन्हीं दो तीन बातों से ये दिल दो चार होता है
Read Full
Bhaskar Shukla
39 Likes
नाज़-ओ-नख़रे क्या उठाए, क्या सुने उस के गिले
देखते ही देखते लड़की घमंडी हो गई

देखते रहने में उस को और क्या होता, मगर
जो थी जान-ए-आरज़ू, वो चाय ठंडी हो गई
Read Full
Kazim Rizvi
तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी
कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो
Jaun Elia
46 Likes
कभी तो मुझे छोड़ जाओगे तुम भी
कहोगे मुझे अब कि फुर्सत नहीं है

भला इस तरह क्यों सताने लगे हो
कहीं छोड़ जाने की हसरत नहीं है
Read Full
Tiwari Jitendra
भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका तो बुरा लगेगा
जिसे तेरी आरज़ू नहीं तू उसे मिला तो बुरा लगेगा

ये आख़िरी कंपकंंपाता जुमला कि इस तअ'ल्लुक़ को ख़त्म कर दो
बड़े जतन से कहा है उस ने नहीं किया तो बुरा लगेगा
Read Full
Zubair Ali Tabish
53 Likes

Short Hasrat Shayari for Instagram Captions

मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद
उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई
Asrar Ul Haq Majaz
19 Likes
हमें इस मिट्टी से कुछ यूँ मुहब्बत है
यहीं पे निकले दम दिल की ये हसरत है

हमें क्यों चाह उस दुनिया की हो मौला
हमारी तो इसी मिट्टी में जन्नत है
Read Full
Harsh saxena
बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए
हम एक बार तिरी आरज़ू भी खो देते
Majrooh Sultanpuri
21 Likes
इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज़-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे
Faiz Ahmad Faiz
25 Likes
कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तनहा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ
Read Full
Kazim Rizvi

Poetic Hasrat Shayari on Unfulfilled Aspirations

क़त्ल से पहले वो हर शख़्स के दिल की हसरत
पूछ लेता था मगर पूरी नहीं करता था
Vishnu virat
37 Likes
'असद' ये शर्त नहीं है कोई मुहब्बत में
कि जिससे प्यार करो उसकी आरज़ू भी करो
Subhan Asad
19 Likes
मरने का है ख़्याल ना जीने की आरज़ू
बस है मुझे तो वस्ल के मौसम की जुस्तजू
Muzammil Raza
19 Likes
मैं सो रहा हूँ तेरे ख़्वाब देखने के लिए
ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए
Shakeel Azmi
42 Likes
आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या
Akhtar Shirani
13 Likes

Hasrat Shayari on Life’s Regrets and Hopes

पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे
मैं जंगल में पानी लाया करता था
Tehzeeb Hafi
44 Likes
कुछ इस लिए भी तेरी आरज़ू नहीं है मुझे
मैं चाहता हूँ मेरा इश्क़ जावेदानी हो
Vipul Kumar
13 Likes
आरज़ू' जाम लो झिजक कैसी
पी लो और दहशत-ए-गुनाह गई
Arzoo Lakhnavi
ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी ऐ आरज़ू कितनी
कि जिस ने जैसा चाहा वैसा अफ़्साना बना डाला
Arzoo Lakhnavi
16 Likes
कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवा
हसरत-ए-दीदार ने आँखों को अंधा कर दिया
Haidar Ali Aatish
26 Likes

Thoughtful Hasrat Shayari on Inner Feelings

अश्कों को आरज़ू-ए-रिहाई है रोइए
आँखों की अब इसी में भलाई है रोइए
Abbas Qamar
34 Likes
ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना
थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें
Majrooh Sultanpuri
26 Likes
हम क्या करें अगर न तिरी आरज़ू करें
दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या
Hasrat Mohani
18 Likes
उसकी हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ
ढूँडने उसको चला हूँ जिसे पा भी न सकूँ
Ameer Minai
26 Likes
फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई
शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया
Asrar Ul Haq Majaz
16 Likes

Hasrat Shayari on Pain and Hope

हम जानते तो इश्क़ न करते किसू के साथ
ले जाते दिल को खाक में इस आरज़ू के साथ
Meer Taqi Meer
25 Likes
आज फिर दिल में तिरे दीद की हसरत जागी
काश फिर काम कोई तुझ से ज़रूरी निकले
Nilofar Noor
28 Likes
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
Bashir Badr
49 Likes
हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी
आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
जिसके संग सफ़र तय करने की आरज़ूू थी मुझे
वो नाविक महज़ काग़ज़ की क़श्ती पर सवार था
Shivali Taneja

Inspirational Hasrat Shayari on Chasing Dreams

उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
Seemab Akbarabadi
46 Likes
बे-आरज़ू भी ख़ुश हैं ज़माने में बाज़ लोग
याँ आरज़ू के साथ भी जीना हराम है
Shuja Khavvar
18 Likes
नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
29 Likes
आरज़ू है कि तू यहाँ आए
और फिर उम्र भर न जाए कहीं
Nasir Kazmi
15 Likes
मंज़िल कभी भी आख़िरी होती नहीं
इच्छा सभी पूरी मेरी होती नहीं

इज़हार करना इश्क का तो है तुझे
वो सोचने से तो तेरी होती नहीं
Read Full
"Dharam" Barot