Subhan Asad

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Subhan Asad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Subhan Asad's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

डाली है ख़ुद पे ज़ुल्म की यूँँ इक मिसाल और उस के बग़ैर काट दिया एक साल और — Subhan Asad
मेरे शाइ'र! मैं वही हुस्ने-दिलावेज़, जिसे चाहने वाले बहुत, जानने वाले कम हैं — Subhan Asad
तेरी यादों की धूप आने लगी है अभी खुल जाएगा मौसम हमारा — Subhan Asad
पकड़ में आती नहीं है कभी वो शाख़-ए-विसाल हम एक बोसा-ए-गुल के लिए तरसते हैं — Subhan Asad
उस ने ये कहके मुझे छोड़ दिया हाशिया छोड़ दिया जाता है — Subhan Asad
मुस्करा देना अचानक कहीं मिल जाने पर और मुझे भूल न जाने का दिखावा करना — Subhan Asad
ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं — Subhan Asad
दो घड़ी को पास आया था कोई दिल पे बरसों हुक्मरानी कर गया — Subhan Asad
तू ने सोचा भी है जानाँ कि तेरे वादे ने कितनी सदियों से नहीं पहना अमल का पैकर — Subhan Asad
यही तलब है जो जीना सिखाए जाती है तुम्हारे ख़्वाब न देखें तो कब के मर जाएँ — Subhan Asad
ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर तेरा ख़याल तो आया तेरी तलब न हुई — Subhan Asad
ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझ सेा बन जाऊँ मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ — Subhan Asad

Ghazal