मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सबतेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सबमेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंदकि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब— Subhan Asad