Amaan Pathan

Amaan Pathan

@Amaanpoet

Amaan Pathan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amaan Pathan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तुम्हें उस्ताद से मिलेगा जो न मिलेगा ग़ज़ल की बाबत में — Amaan Pathan
आशिक़ी सिर्फ़ रुसवाई देती है और आशिक़ों का कोई मक़बरा भी नहीं — Amaan Pathan
मैं कैसे हार मानूँ बिन लड़े ग़ुरबत के सहरा से अभी तो ग़म भुलाने हैं ख़ुशी का बीज बोना है — Amaan Pathan
मैं तो रातों में चीख़ता हूँ बहुत वो भी थोड़ी सी चश्म तर है क्या — Amaan Pathan
वो मुझ को छोड़ कर जबसे गया है मैं ये दुनिया जलाना चाहता हूँ — Amaan Pathan
जो मेरे पास आना चाहते हैं उन्हीं से दूर जाना चाहता हूँ — Amaan Pathan
उस ने रक्खा था हाथ साहिल पर तब से दरिया में भी शरारे हैं — Amaan Pathan
करूँँ तो कैसे करूँँ तुझ पे मैं यक़ीन बता नहीं है ख़ुद पे भी जब कोई ऐतिबार मुझे — Amaan Pathan
अब आस्तीन के साँपों से दूर रहना है उसे कहो न करे फ़ोन बार बार मुझे — Amaan Pathan
यही ख़्वाहिश है मैं पल्लू में तेरे घड़ी अपनी फँसाना चाहता हूँ — Amaan Pathan
कुछ किताबें हैं बस ताक़ पर और हर तरफ़ बिखरे यादों के साए — Amaan Pathan
ज़िंदगी मेरी दे दो किसी और को अब न ताक़त है और हौसला भी नहीं — Amaan Pathan
इन ख़ुश्क धड़कनों की शिफ़ा करते करते हम दरिया किनारे दिल ये कई बार रख चुके — Amaan Pathan
मेरे पैरों में छाले हैं मेरी आँखों में पानी है मुझे फिर भी मोहब्बत है मोहब्बत है न जाने क्यूँँ — Amaan Pathan
किसी मासूम ने लूटा था मुझ को नया दिलबर सयाना चाहता हूँ — Amaan Pathan
बाम-ए-गर्दूं पे जो सितारे हैं तेरी आँखों के इस्तिआरे हैं — Amaan Pathan
डाइरी फाड़ कर बनाए जहाज़ बीच मँझधार में उतारे हैं — Amaan Pathan
बचा लिया मुझे ग़र्क़ाब होने से उस ने जुनून ए इश्क़ है लाया नदी के पार मुझे — Amaan Pathan
यूँँ तो फ़िराक़-ए-यार में क्या क्या नहीं किया लेकिन तुम्हारे जैसा तमाशा नहीं किया — Amaan Pathan
नया सा दिल बना कर दे मुझे जो इक ऐसा कार-ख़ाना चाहता हूँ — Amaan Pathan

Ghazal

भले ही ग़ुस्से में पहले दो तीन तमाचे लगाएगा लेकिन फिर भी आड़े वक़्त में काम तो बाप ही आएगा काठ की हाँडी अब न चढ़ेगी ज़ुल्म के चूल्हे पर यारो वक़्त का पहिया घूमेगा मुंसिफ़ भी जेल में जाएगा तीर लगा था पीठ पे जो अब निकल गया है सब्र करो अब उट्ठेगा चीता वापिस गरजेगा ग़ुर्राएगा उस को भी तो याद आएँगे साथ बिताये वो लम्हें वो भी तड़पेगा रातों में चीखेगा चिल्लाएगा वक़्त बचा है कुछ सालों का कर ले जो भी करना है सर पीटेगा रातों में फिर बच्चों पर झुँझलाएगा झूटी ता'रीफ़ों के पीछे भागते रहते हो दिन भर अभी अगर मैं सच कह दूँगा वो तुम को चुभ जाएगा उसे मेरे शेर-ओ-फ़न से जाने क्यूँँ इतनी वहशत है पहले ग़ज़लें दफ़्न करेगा फिर मुझ को दफ़नाएगा — Amaan Pathan
क़ैद से बाहर मैं आना चाहता हूँ आज फिर से मुस्कुराना चाहता हूँ हारने की हर वजह है सामने पर जीतने का इक बहाना चाहता हूँ रात हो कितनी ही काली ख़त्म होगी इस ग़ज़ल में ये बताना चाहता हूँ मैं ख़ुदा बेबस हूँ लेकिन तू नहीं है फिर तेरी चौखट पे आना चाहता हूँ सब के चेहरों पर यहाँ सौ सौ मुखौटे मैं अब इन से दूर जाना चाहता हूँ मैं ने अपनी जान की बाज़ी लगा दी हार कर तुझ को हराना चाहता हूँ काश मिल जाएँ पुराने यार फिर से फिर पुराने गीत गाना चाहता हूँ अब न घर टूटे किसी आशिक़ का मौला मैं बस अपना घर बसाना चाहता हूँ जा निकल जा इश्क़ अब तू दिल से मेरे तुझ से मैं पीछा छुड़ाना चाहता हूँ — Amaan Pathan
फिर से वो याद आई मुझे कुछ दिन गुज़र जाने के बा'द सिगरेट की अब फिर से तलब उठने लगी खाने के बा'द ये रीत तो चलती रहेगी आशिक़ी में मौत की आशिक़ तो होंगे और भी फिर तेरे दीवाने के बा'द देखो मेरे कुर्ते पे तुम गिरने न दो इक बूँद भी घर भी मुझे जाना है वापिस यार मयख़ाने के बा'द ग़मगीन हैं जो लोग ये आँखें मिरी नम देख कर कह दे इन्हें साँस आएगी मुझ को तिरे आने के बा'द मंदिर कभी मस्जिद कभी फिर टूट कर मयख़ाने में ढूँढा तुझे हर इक जगह तेरे चले जाने के बा'द तेरे लिए सब कुछ जला दूँ तो भी मुझ को ग़म नहीं बस इक दिया जलता रहेगा दुनिया बुझ जाने के बा'द सब भूल जाएँगे मिरा लिक्खा मगर तुम देखना शे'र इक न इक ज़िंदा रहेगा मेरे मर जाने के बा'द — Amaan Pathan
जो कल इधर था वो अब किधर है मुझे पता है मुझे ख़बर है हर इक डगर पर मेरी नज़र है मुझे पता है मुझे ख़बर है मुझे लिटा तो दो क़ब्र में तुम पर आँख मेरी खुली ही रखना ज़रा सी दूरी पे हम सफ़र है मुझे पता है मुझे ख़बर है कोई ज़रूरत नहीं है बिल्कुल किसी को समझाने की यहाँ पर तुम्हें पता है तुम्हें ख़बर है मुझे पता है मुझे ख़बर है यूँँ ही नहीं हैं ख़िलाफ़ मेरे तमाम लोग आज थे जो अपने हर इक बशर पर तेरा असर है मुझे पता है मुझे ख़बर है मुझे भी हाँ दिख रही हैं लाशें हर एक परवाने की यहाँ पे मेरी कहानी भी मुख़्तसर है मुझे पता है मुझे ख़बर है मुझे बताओ मत उस के क़िस्से मैं आख़िरी बार कह रहा हूँ मुझे पता है मुझे ख़बर है मुझे पता है मुझे ख़बर है — Amaan Pathan
हाफ़िज़ों के बढ़ गए हैं देख लो रुबाब अब कुछ शराबियों ने भी कमा लिए सवाब अब आदतन रहा सदा मैं ग़म का ही मुरीद और कर रहे हो तुम वो मेरी आदतें ख़राब अब चाँद ला सका नहीं कभी सनम है सच मगर ला रहा हूँ मैं तुम्हारी ख़ातिर आफ़ताब अब है फ़ज़ा नई नई सी नूर है नया नया आ रहा है यार मेरा हो के बे-नक़ाब अब उठ गए थे जब तो फिर से बैठने लगे हो क्यूँँ ख़त्म हो चुकी है बोतलों में सब शराब अब जाहिलों के साथ तू ने उम्र सारी काट दी एक बार बात मान कर उठा किताब अब ढूँढ़ता रहा मैं तब कहीं मुझे दिखे नहीं दे रहे हो मुझ को जाने क्यूँ ये तुम गुलाब अब क्यूँँ बुरा भला कहें किसी को भी अगरचे हम बन गए हैं हिज्र में जो साहिब-ए-किताब अब पूछ ही लिया है जब कि ठीक हो अमान तुम देख लो ज़रा सी देर आलम-ए-ख़राब अब — Amaan Pathan
मैं पागल हो चुका हूँ इश्क़ में ये लोग कहते हैं बस इक तू ही नहीं कहती जो सारे लोग कहते हैं ये मैं ने कब कहा ऐ यार तू ने बे-वफ़ाई की गड़े ख़ंजर हैं मेरी पीठ में ये लोग कहते हैं तुम्हें जब ये पता है मैं तुम्हारा हूँ तुम्हारा हूँ तो फिर तुम भूल जाओ जो ये झूटे लोग कहते हैं तुम्हारा राज है जो फ़ैसला चाहे सुना दो तुम मिरे हक़ में तो बस दो चार सच्चे लोग कहते हैं भले ही जान-लेवा हो सियासत को ग़लत कहना मगर फिर भी ये सच ईमान वाले लोग कहते हैं कभी कुछ है मिला चाहत में ज़िल्लत के सिवा बोलो ये बातें ख़ास कर चाहत में हारे लोग कहते हैं — Amaan Pathan
शहवत तो है बहुत पर क्या प्यार जानते हो पाकीज़गी कहाँ तुम अय्यार जानते हो कहने को हूँ मैं ज़िंदा उस के बिना भी यारो जीना हुआ है कितना दुश्वार जानते हो ज़ुल्म-ओ-सितम से थककर ख़ुद को बदल न देना वो जानते हैं नफ़रत तुम प्यार जानते हो तुम हो ग़रीब या हो दुनिया में सब से ऊपर इक खेल है जिसे तुम संसार जानते हो क्या जानते हो क्यूँँ अब ख़ामोश रह रहा हूँ दुनिया से क्यूँँ हुआ मैं बेज़ार जानते हो कोशिश ही जब नहीं की तो ये बता दो मुझ को क्या जीत जानते हो क्या हार जानते हो क्या ही किया है तुम ने ये पूछते हो मुझ से कितना लुटा था मेरा घर-बार जानते हो लाखों दबी हैं लाशें बे-नाम आशिक़ों की तुम इश्क़ में मरे बस दो चार जानते हो शायद अमान हम को फिर से मिले कहीं वो कितनी दुआएँ की हैं इस बार जानते हो — Amaan Pathan

Nazm

“ख़ुदा अब मुझे चैन मिलता नहीं है” न आराम अब मुझ को इक पल भी यारों मुझे याद आया था वो कल भी यारों वो यारों मेरे साथ क्यूँँ कर गया ये कोई तो दवा हो जो आराम दे दे मैं दफ़्तर के पहिये में पिसने लगा हूँ हैं हाथों में पत्थर मैं ख़ुद आइना हूँ वो तारों से आगे मैं धरती के अंदर बना है वो पागल जो कल था सिकंदर वो कल था जहाँ पर वो अब भी वहीं है ख़ुदा अब मुझे चैन मिलता नहीं है मैं बरसों से दर दर भटकता रहा हूँ मैं बेचैन भी हूँ मैं बे-आसरा हूँ नए ज़ख़्म फिर से है लाई मोहब्बत कि जब से हुई है परायी मोहब्बत मोहब्बत का मुझ को सिला ये मिला है दिवानों का अब साथ में क़ाफ़िला है सुकूँ ढूँढ़ते ढूँढ़ते थक गया हूँ मैं दुनिया से आगे फ़लक तक गया हूँ ये दिल है कहीं और धड़कन कहीं है ख़ुदा अब मुझे चैन मिलता नहीं है — Amaan Pathan