पहले आता था अब नहीं आता
मेरे ख़्वाबों में रब नहीं आता
कुछ किताबें भी हाथ में पकड़ो
फ़ोन में सब का सब नहीं आता
इक तुम्हारी ही बज़्म है जिस
में
कोई भी बे-अदब नहीं आता
यूँँ तो आ जाता है वो बाज़ दफ़ा
पर जब आना हो तब नहीं आता
उसे कह दो वो जल्दी आ जाए
साँस रुकती है जब नहीं आता
आँसुओं से चुकायी है क़ीमत
ये हुनर बे-सबब नहीं आता
क्यूँँ अमान आज ही दिखा है ख़ला
यार तो रोज़-ओ-शब नहीं आता
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