Meaning of

मानिंद

maanind • مانند

जैसा; समान

like; similar to

جیسا; مشابہ

Persian

गुज़रते वक़्त के मानिंद है जो मेरी आँखें उसी को ढूँढती हैं — Kaif Uddin Khan
मैं ठहरना चाहती हूँ कोह के मानिंद, पर शम्स बन के रोज़ ही घर से निकलना है मुझे — Priya omar
एक रेगिस्तान दुनिया ऊॅंट के मानिंद हम दूर तक पानी न कोई पेड़ सायादार है — Hameed Sarwar Bahraichi
उस से इक बार तो रूठूँ मैं उसी की मानिंद और मेरी तरह से वो मुझ को मनाने आए — Parveen Shakir
इस वतन में छोटी सी बुलबुल के हूँ मानिंद मैं मेरा मज़हब कुछ भी हो पर हूँ तो सारा हिंद मैं — Firdous khan
जलो तो दीप की मानिंद दुनिया को उजाला दो वगरना रौशनी के बिन धुएँ से फ़ाएदा क्या है — Nityanand Vajpayee
किताबें दिल की मानिंद होती हैं किताबें ग़ैरों को दी नहीं जाती — Dr Saniya Tasnim

‘मानिंद’ शब्द तुलना और समानता की भावना को जागृत करता है। कविता में, यह अक्सर विभिन्न तत्वों के बीच समानता स्थापित करने के लिए प्रयोग होता है, जिससे समझ या भावना का पुल बनता है। यह कवियों के लिए एक उपकरण है, जिससे वे एक चीज़ को दूसरी के प्रकाश में देख सकते हैं।

कवि अक्सर 'मानिंद' का उपयोग प्रकृति और मानवीय भावनाओं के बीच तुलना करने के लिए करते हैं। यह दिखा सकता है कि कैसे एक क्षणिक पल एक फुसफुसाहट के समान है या कैसे प्रेमी की दृष्टि चांदनी के समान है।

अपनी सरलता में, 'मानिंद' विभिन्न दुनियाओं को जोड़ने का एक गहन तरीका प्रस्तुत करता है। यह हमें जोड़ने वाली अंतर्निहित समानताओं की एक कोमल याद दिलाता है।