आज है कुछ सबब आज की शब न जा
जान है ज़ेर-ए-लब आज की शब न जा
क्या पता फिर तिरे वस्ल की साअ'तें
हूँ कहाँ कैसे कब आज की शब न जा
चाँद क्या फूल क्या शम्अ' क्या रंग क्या
हैं परेशान सब आज की शब न जा
वक़्त को कैसे तरतीब देते हैं लोग
आ सिखा दे ये अब आज की शब न जा
वो सहर भी तुझी से सहर थी 'असद'
शब भी तुम से है शब आज की शब न जा
— Subhan Asad















