chand kaliyaan nashaat ki chun kar muddaton mahv-e-yaas rehta hoon | चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ

  - Sahir Ludhianvi

चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ

  - Sahir Ludhianvi

Jashn Shayari

Our suggestion based on your choice

    जो बुजुर्गों की दुआओं के दीयों से रौशन
    रोज़ उस घर में दीवाली का जश्न होता है
    Pratap Somvanshi
    26 Likes
    ये उसकी मेहरबानी है वो घर में ही सँवरती है
    निकल आए जो महफ़िल में तो क़त्ल-ए-आम हो जाए
    Ashraf Jahangeer
    39 Likes
    उम्र के आखिरी मुकाम में हम
    मिल भी जाए तो क्या खुशी होगी

    क्या सितम तुमको देखने के लिए
    हमको दुनिया भी देखनी होगी!
    Read Full
    Vikram Sharma
    32 Likes
    ज़ब्त करो गर ग़म के बादल छाए हैं,
    रक़्स करो के बारिश आने वाली है
    Darpan
    32 Likes
    हुनर से काम लिया पेंट ब्रश नहीं तोड़ा
    बना लिया तेरे जैसा ही कोई रंगों से

    मुझे ये डर है कि मिल जाएगी तो रो दूँगा
    मैं जिस ख़ुशी को तरसता रहा हूँ बरसों से
    Read Full
    Rahul Gurjar
    नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है
    हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में
    Ahmad Mushtaq
    42 Likes
    सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
    हर घर में बस एक ही कमरा कम है
    Javed Akhtar
    48 Likes
    फिर इस के बाद मनाया न जश्न ख़ुश्बू का
    लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते
    Azhar Iqbal
    35 Likes
    क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए
    वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
    Nasir Kazmi
    46 Likes
    हो न हो एक ही तस्वीर के दो पहलू हैं
    रक़्स करता हुआ तू आग में जलता हुआ मैं
    Shahid Zaki
    27 Likes

More by Sahir Ludhianvi

As you were reading Shayari by Sahir Ludhianvi

    अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब
    अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं
    Sahir Ludhianvi
    तिरी दुनिया में जीने से तो बेहतर है कि मर जाएँ
    वही आँसू वही आहें वही ग़म है जिधर जाएँ

    कोई तो ऐसा घर होता जहाँ से प्यार मिल जाता
    वही बेगाने चेहरे हैं जहाँ जाएँ जिधर जाएँ

    अरे ओ आसमाँ वाले बता इस में बुरा क्या है
    ख़ुशी के चार झोंके गर इधर से भी गुज़र जाएँ
    Read Full
    Sahir Ludhianvi
    टैंक आगे बढ़ें कि पीछे हटें
    कोख धरती की बाँझ होती है
    Sahir Ludhianvi
    43 Likes
    माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके
    कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम
    Sahir Ludhianvi
    21 Likes
    तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
    तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
    Sahir Ludhianvi
    60 Likes

Similar Writers

our suggestion based on Sahir Ludhianvi

Similar Moods

As you were reading Jashn Shayari Shayari