@khurram-afaq
Khurram Afaq shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Khurram Afaq's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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यूँ न कर वस्ल के लम्हों को हवस से ताबीर
चंद पत्ते ही तो तोड़े हैं शजर से मैं ने
तूफ़ान की उम्मीद थी आँधी नहीं आई
वो आप तो क्या उस की ख़बर भी नहीं आई
शायद वो मोहब्बत के लिए ठीक नहीं था
शायद ये अँगूठी उसे पूरी नहीं आई
नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे
मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे
तुम्हारी मेज़बानी के बहाने
कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
बात करते हुए बे-ख़याली में ज़ुल्फ़ें खुली छोड़ दी
हम निहत्थों पे उसने ये कैसी बलाएँ खुली छोड़ दी
साथ जब तक रहे एक लम्हे को भी रब्त टूटा नहीं
उसने आँखें अगर बंद कर ली तो बाँहें खुले छोड़ दी
बातचीत में आला हो बस ठीक न हो
फ़ायदा क्या महबूब अगर बारीक न हो
हम तेरी क़ुर्बत में अक्सर सोचते हैं
दरिया खेत के इतना भी नज़दीक न हो
ज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैं
देर से पट्टी खोलेंगे
चेहरा पढ़ने वाले चोर
गठरी थोड़ी खोलेंगे
अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है
चराग़ों के तले भी रोशनी जाने लगी है
नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा
कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है
किए कराए का सारा हिसाब दूँगा मैं
सवाल जो भी करोगे जवाब दूँगा मैं
ये रख-रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं
बिछड़ते वक़्त भी तुझको गुलाब दूँगा मैं
जो ज़रा ठीक से किरदार निगारी हो जाए
ये कहानी तो हक़ीक़त पे भी तारी हो जाए
तेरे हामी है सो उठ कर भी नहीं जा सकते
जाने किस वक़्त यहाँ राय-शुमारी हो जाए
ख़ुद बुलाओ के वो यूँ घर से नहीं निकलेगा
यहाँ इनाम मुक़द्दर से नहीं निकलेगा
ऐसे मौसम में बिना काम के आया हुआ शख़्स
इतनी जल्दी तेरे दफ़्तर से नहीं निकलेगा
बुरा मनाया था हर आहट हर सरगोशी का
सोचो कितना ध्यान रखा उसने ख़ामोशी का
तुम इसका नुक़सान बताती अच्छी लगती हो
वरना हम को शौक़ नहीं है सिगरेट-नोशी का
बड़ी मुश्किल से नीचे बैठते हैं
जो तेरे साथ उठते-बैठते हैं
अकेले बैठना होगा किसी को
अगर हम तुम इकट्ठे बैठते हैं