बातचीत में आला हो बस ठीक न होफ़ाइदा क्या महबूब अगर बारीक न होहम तेरी क़ुर्बत में अक्सर सोचते हैंदरिया खेत के इतना भी नज़दीक न हो— Khurram Afaq