@bhuwansingh
Bhuwan Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Bhuwan Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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मैं आज कर रहा हूँ ये एलान साहिबा
दरबार-ए-दिल की आप ही हो शान साहिबा
मैं आप के इलावा किसी और का नहीं
इतना हुआ न करिए परेशान साहिबा
बना है सिगरटों का ऐसा आशियाँ दिल में
कि धड़कनों से ज़ियादा है अब धुआँ दिल में
तमाम उम्र रहूँगा मैं इसके अंदर क़ैद
तमाम उम्र रहेगा तिरा मकाँ दिल में
कह दूँ तो छोड़ आए वो गुलशन मेरे लिए
इतना करेगा कौन ख़ुसूसन मेरे लिए
हुस्न-ए-गुल-ए-चमन पे ठहर जाए आफ़ताब
साया-ए-गुल ही तो है नशेमन मेरे लिए
भले ही ग़म मिरे हिस्से में छोड़ कर जाना
मगर तू कुछ तिरे बदले में छोड़ कर जाना
सफ़र तू साथ में क़ामिल करें तो लानत है
तिरा तो बनता है आधे में छोड़ कर जाना
वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी
मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी
मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था
वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी
तन्हा ही हमने वक़्त गुज़ारा अभी तलक
कोई हुआ नहीं है हमारा अभी तलक
होता है काफ़ी वो जो समझदार के लिए
हमको मिला नहीं वो इशारा अभी तलक
होगा दुख कल उसे मंज़र के बदल जाने से
आज जो ख़ुश है दिसंबर के बदल जाने से
रोज़-ओ-शब रोते हैं हम कल भी हमें रोना है
हमको क्या फ़र्क कैलेंडर के बदल जाने से
तूने मेरे लिए यूॅं तो क्या क्या नहीं किया
पर मुझको इस तरह कभी तन्हा नहीं किया
मैं ख़ुश था इसमें भी कि हम इक दुनिया में हैं दोस्त
बस तूने दुनिया छोड़ के अच्छा नहीं किया
बारहा उसकी गली और वो दर दिखता था
पर जिसे देखना था एक नज़र दिखता था
क्या करूॅं अब कि खड़ी कर गया दीवार रक़ीब
वरना घर से मेरे महबूब का घर दिखता था
रूह को अंदर से पहले ख़ूब झिंझोड़ा गया
फिर मिरा हर ख़्वाब मेरे सामने तोड़ा गया
हश्र कुछ ऐसा हुआ है मेरे इस किरदार का
क़िस्तों में तोड़ा गया फिर रिश्तों में छोड़ा गया
सुधरने के लिए इक और साल लेना है
ये इश्क़ दिल से मगर अब निकाल लेना है
मेरे हो तुम यही बस सोचकर जिया अब तक
अब आगे ऐसा ही इक वहम पाल लेना है
कोई तरीक़ा ही नहीं इसको बचाने के लिए
दिल तो बना ही है मियाँ बस चोट खाने के लिए
उम्मीद मत रखना कि अब वादे निभाएगा कोई
हर शख़्स वादे करता है अब तोड़ जाने के लिए
मुझको वो रात ख़ास लगती है
नींद जब तेरे पास लगती है
सिर्फ़ माथे पे बोसा मत किया कर
इन लबों को भी प्यास लगती है
मेरी इन आँखों से हर अश्क उतारने के लिए
बस इक ही ग़म लगा उम्रें गुज़ारने के लिए
कई लिबास मेरे पास हैं सँवरने को
मगर मिला नहीं कुछ मन सँवारने के लिए
इस कहानी को अब अंजाम दिया जाएगा
मेरे किरदार को आराम दिया जाएगा
एक दूजे से कभी होगी नहीं शादी पर
मेरी बेटी को तिरा नाम दिया जाएगा
जितना सोचता हूँ उसको उतनी खलती रहती है
इक ही बात मेरे ज़ेहन में यूँ चलती रहती है
इक मैं हूँ कि जिसका दुनिया में बस इक ही यार है
इक वो है जो अपने यार ही बदलती रहती है
किसी से बन गया है रिश्ता उस तन का
नज़र आने लगा है दाग़ गर्दन का
हक़ीक़त मान लूँ इन क़समों को कैसे
यक़ीं कैसे करूॅं मैं अपनी दुल्हन का
हर इक मुआमले में तू मुझे कमाल लगा
तो तुझसे मिल के मुझे अच्छा अपना हाल लगा
यूँ छोड़ दे तेरा एहसास इश्क़ से मुझ पर
तू अपने हाथों से इन गालों पे गुलाल लगा