देने को दे सकूँगा फ़क़त अपनी जान मैंअब देते देते थक चुका हूँ इम्तिहान मैंरक्खा नहीं है कुछ भी यहाँ पर मेरे लिएसो जा रहा हूँ छोड़ के अब ये जहान मैं— Bhuwan Singh