Nityanand Vajpayee

Nityanand Vajpayee

@Nityopamnyu11

Nityanand Vajpayee shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nityanand Vajpayee's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

इस दर्जा बे-क़रार हैं वो इंतिज़ार में ख़ुद को मिटा न बैठें कहीं मेरे प्यार में — Nityanand Vajpayee
डसेगी ख़ास ये नागिन किसी पड़ाव पे अब हमीं ने प्यार से पाला है आस्तीं में इसे — Nityanand Vajpayee
अंधों ने मेरे हुस्न की तारीफ़ नहीं की बहरों ने कहा आप की तकरीर ग़लत है — Nityanand Vajpayee
तमाम उम्र नए हादिसों से गुज़रा हूँ अब और मौत मुझे क्या ही हादिसा देगी — Nityanand Vajpayee
नूर-ए-ख़ुदा है हर इंसाँ में फिर किस को नाशाद करोगे — Nityanand Vajpayee
बारूदों की पौध लगा कर जड़ में ख़ुद को खाद करोगे — Nityanand Vajpayee
फ़ज़ा में इक नई रंगत है बे-ईमान है मौसम भले कुछ देर ही रुकते मगर दिलबर चले आते — Nityanand Vajpayee
हुए हैं घाव जो दिल पर बिरह की बर्छियों से उफ़ तुम्हारे लम्स से करने इन्हें कमतर चले आते — Nityanand Vajpayee
ख़ुदा-रा कौन सा ग़म टूट पड़ता गर चले आते बिला-शक आस्तीं में तुम लिए नश्तर चले आते — Nityanand Vajpayee
मुझे उमीद नहीं है किसी से फूलों की मिलेंगे ख़ार उन्हीं को गुलाब समझूँगा — Nityanand Vajpayee
सिर्फ़ मतलब के लिए प्यार जिन्होंने है किया वक़्त पड़ने पे वही लोग दग़ा देंगे ज़रूर — Nityanand Vajpayee
रहे हो आप काँटों में महीनों तक मेरे दिलबर बस इक शब होने को सोचा था हम-बिस्तर चले आते — Nityanand Vajpayee
इस को छेड़ा उस को छेड़ा कितना और विवाद करोगे — Nityanand Vajpayee
हर दिन एक फ़साद करोगे क्या दुनिया बर्बाद करोगे — Nityanand Vajpayee
मिलन मुमकिन बनाने की जुगत कुछ तो बताएँ आप अकेले किस क़दर भीगूँ मैं सावन भर चले आते — Nityanand Vajpayee
तड़प मेरे कलेजे की समझ भी जाओ जान-ए-जाँ ज़ियादा और खुल कर क्या कहूँ बस घर चले आते — Nityanand Vajpayee
ग़ज़ल बन कर मेरे सीने से लग जा मैं तेरा लुत्फ़ उठाना चाहता हूँ — Nityanand Vajpayee
मिलो जब भी कभी जाहिल से तो ख़ामोश रहिए आप मियाँ जाहिल को आलिम से अजब तकलीफ़ होती है — Nityanand Vajpayee

Ghazal

मज़म्मत है मज़म्मत है मज़म्मत है मज़म्मत है फ़क़त मुझ को ही क्यूँ इस दुनियाभर को तुझ सेे दिक़्क़त है वो दहशत-गर्द थे या कायरों का झुंड था कोई निहत्थों और मासूमों पे गोली कैसी वहशत है ये किस मज़हब की सिखलाई है किस अल्लाह का पैग़ाम अगर ऐसा नहीं है फिर बहुत गंदी हिमाक़त है अगर तुम जंग-जू होते तो करते आ के दो-दो हाथ मगर तुम कायरों में कब भला होनी ये हिम्मत है मुजाहिद कहते हो ख़ुद को है मतलब भी तुम्हें मालूम अगर ऐसे मुजाहिद हो तो फिर तो तुम पे लानत है यूँँ बेबस और मज़लूमों निहत्थों पर तुम्हारा वार सुबूत इस बात का है तुम में कुफ़्रों की अलामत है — Nityanand Vajpayee
किसी से बे-मुरब्बत हो के रंजिश बेवजह मत कर मगर चमचों के जैसे तेल मालिश बेवजह मत कर ख़ुद अपनी मौत की तैयारियों में लग भले मानुस जहाँ में ही जमें रहने की साज़िश बेवजह मत कर किराएदार है तू भी किराएदार हैं वो भी वसूली करने जैसी झूठी कोशिश बेवजह मत कर सभी ने अपनी-अपनी झोलियों में भर रखी बारूद तआरुफ़ से तू अपने और आतिश बेवजह मत कर मुनक्क़स ये दर-ओ-दीवार ये मेहराब और ये ताक़ यहाँ के सब यहीं पर हैं तू लग़्ज़िश बेवजह मत कर समझता है अगर क़ुर्बानियों के मायने तो ठीक वगरना फ़ौज में आने की काविश बेवजह मत कर तेरी इज़्ज़त करे जो भी उसे इज़्ज़त से आना पेश नहीं तो 'नित्य' इस उस की नवाज़िश बेवजह मत कर — Nityanand Vajpayee
मेरे दिल में मचलता है वो इक जज़्बात है ही क्या सिपहसालार हूँ मैं और मेरी ज़ात है ही क्या ज़रा सी कामयाबी पर ग़ुरूर उन को है इतना क्यूँ ये दुनिया ख़्वाब है तो ख़्वाब की औक़ात है ही क्या महीनों की ग़ज़ब प्यासी ज़मीं का ज़र्रा-ज़र्रा ख़ुश्क ये कुछ हफ़्तों की नाज़ुक शरबती बरसात है ही क्या किसी के दिल में जब नफ़रत पनप बैठी मेरे ख़ातिर तो मेरे एकतरफ़ा प्यार की सौग़ात है ही क्या उठा रक्खी क़सम उस ने मुझे कमतर समझने की कहूँ मैं लाख बेहतर पर वो मेरी बात है ही क्या समझते हैं वो अपने आप को इस दर्ज़ा दानिश-मंद कि उन के सामने यूनान का सुक़रात है ही क्या — Nityanand Vajpayee
मज़म्मत है मज़म्मत है मज़म्मत है मज़म्मत है फ़क़त मुझ को ही क्या इस दुनियाभर को तुझ सेे दिक़्क़त है वो इंसाँ कैसे हो सकता जिसे इंसाँ से नफ़रत है वो मज़हब क्या न जिस में बाइस-ए-अम्न-ओ-मोहब्बत है कहाँ जन्नत मिलेगी उन को जो हैं अम्न के क़ातिल ये मासूमों पे हैबत किस पयम्बर वाली उम्मत है वो दहशत-गर्द थे या कायरों का झुंड था कोई निहत्थों और मासूमों पे गोली कैसी वहशत है ये किस मज़हब की सिखलाई है किस अल्लाह का है पैग़ाम अगर मज़हब यही है फिर तो ये गंदी हिमाक़त है अगर तुम जंग-जू होते तो करते आ के दो-दो हाथ मगर तुम कायरों में कब भला होनी ये हिम्मत है मुजाहिद कहते हो ख़ुद को है मतलब भी तुम्हें मालूम अगर ऐसे मुजाहिद हो मियाँ फिर तुम पे लानत है यूँँ बेबस और मज़लूमों निहत्थों पर तुम्हारा वार सुबूत इस बात का है तुम में कुफ़्रों की अलामत है अभी 'उपमन्यु' सारे सब्रों की सीमाएँ होती ख़त्म तुम्हें अब देखना होगा कि हम में कितनी जुर्रत है — Nityanand Vajpayee
रोना धोना ये तो केवल एक कहानी होती है अव्वल तो मैं ने अश्कों से प्यास बुझानी होती है दिल के अंदर उन की यादों के कुछ सूखे बंजर हैं उन में बारिश कर के अक्सर दूब उगानी होती है मावस के मेले में उस सेे मेरा मिलना ठीक नहीं मुझ सेे मिल कर बेचारी की खींचातानी होती है पूरा जीवन उन को मेरी आँखों ने जी भर देखा उन की लौ से दिल के अंदर जोत जगानी होती है पागल वागल कुछ भी कह लो इस सेे मुझ को फ़र्क नहीं ख़ुद के जिस्म-ओ-जाँ में मुझ को आग लगानी होती है माँ बाबू जी के क़दमों में ही बसती जन्नत वन्नत बाक़ी तो ये गंगा जमुना केवल पानी होती है 'नित्यानन्द' किसी के बहकावे में बिल्कुल मत आना तुम ने अपनी नाव किनारे ख़ुद ही लगानी होती है — Nityanand Vajpayee

Nazm

दहशत सारी दुनिया में अँधेरा है जहन्नम जैसा हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा फ़तह बंदूकों ने पाई है सर-ए-नौ देखो सतह दहशत ने बनाई है सर-ए-नौ देखो घर में मौतों का बसेरा है जहन्नम जैसा हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा कौन इंसान को इंसान का दुश्मन करता कौन बारूद बिछा लाशों पे नर्तन करता दर्द ये किस ने बिखेरा है जहन्नम जैसा हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा मैं ने किंदील मेरे दिल का जलाया लेकिन कुछ अँधेरे को उजाले से मिटाया लेकिन धुँधला धुँधला सा सवेरा है जहन्नम जैसा हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा आज दुनिया पे हुकूमात हुए ज़ुल्मों के क़ाबिल-ए-ग़ौर सवालात हुए ज़ुल्मों के बढ़ता आतंक का डेरा है जहन्नम जैसा हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा — Nityanand Vajpayee
"टूटा दिल" टूटते दिल की जब आवाज़ सुनाएँगे तुम्हें तब मेरे दर्द के अंदाज़ रुलाएँगे तुम्हें मैं ने बोए हैं कई बीज जो अपनेपन के बारिशें इश्क़ की पनपाने उन्हें आएँगी फूल गुलशन में नवेले जो खिलेंगे हिल-मिल तितलियाँ झूम के बहलाने उन्हें आएँगी उस बग़ीचे में मेरी यादों के गाएँगे भँवर शोख़ मासूम नज़ारे भी चिढ़ाएँगे तुम्हें टूटते दिल की जब आवाज़ सुनाएँगे तुम्हें तब मेरे दर्द के अंदाज़ रुलाएँगे तुम्हें फिर अँधेरों में कहीं छुप के जो रोओगे तुम बीच मँझधार में यूँँ छोड़ के जाने के बा'द अपने मतलब के लिए मुझ को किया था रुसवा ख़ून-ए-दिल मेरा सर-ए-आम बहाने के बा'द मैं भले तुम को दुआएँ ही हमेशा दूँगा इन दु'आओं के भी फ़रमान दुखाएँगे तुम्हें टूटते दिल की जब आवाज़ सुनाएँगे तुम्हें तब मेरे दर्द के अंदाज़ रुलाएँगे तुम्हें मेरी साँसों में अभी तक है तुम्हारी ख़ुश्बू और गीतों में सरासर हैं तुम्हारे चर्चे अब तो लोगों की ज़ुबानी भी सुने जा सकते इश्क़ में हद से गुज़रने के हमारे चर्चे लोग अब भूल चुके सारे पुराने क़िस्से इस कहानी में मेरे साथ में लाएँगे तुम्हें टूटते दिल की जब आवाज़ सुनाएँगे तुम्हें तब मेरे दर्द के अंदाज़ रुलाएँगे तुम्हें — Nityanand Vajpayee
ख़ुद-ब-ख़ुद मिट के दिखाने पे तुली है दुनिया ख़ुद को गर्दिश में मिलाने पे तुली है दुनिया ख़ुद-ब-ख़ुद मिट के दिखाने पे तुली है दुनिया रोज़ कटते हैं हज़ारों ही शजर हरियाले आदमी रोक न पाया वो इरादे काले सिर्फ़ पैसों को कमाने पे तुली है दुनिया ख़ुद-ब-ख़ुद मिट के दिखाने पे तुली है दुनिया कितने नादान यहाँ लोग हुए जाते हैं दूध पी कर के वो गउओं का उन्हें खाते हैं अपनी माँ तक को नशाने पे तुली है दुनिया ख़ुद-ब-ख़ुद मिट के दिखाने पे तुली है दुनिया कारख़ानों के धुँए घोंट रहे दम पे दम सड़ते मलबों से पटी नदियाँ हुईं हैं कम-कम मौत सीने से लगाने पे तुली है दुनिया ख़ुद-ब-ख़ुद मिट के दिखाने पे तुली है दुनिया मूल्य गिरते ही चले जाते हैं नैतिकता के माँ-पिता बंधु बहिन बढ़ती अमानुषता के सब की अस्मत ही लुटाने पे तुली है दुनिया ख़ुद-ब-ख़ुद मिट के दिखाने पे तुली है दुनिया अब तो फ़ैशन का ज़माना ये बताते हैं लोग मरमरी जिस्म खुलेआम दिखाते हैं लोग तन से कपड़ों को हटाने पे तुली है दुनिया ख़ुद-ब-ख़ुद मिट के दिखाने पे तुली है दुनिया — Nityanand Vajpayee
ख़ुदा क़सम दिल खो गया है उन में हमारा ख़ुदा क़सम कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम उल्फ़त भरी ये आँखें भी करती हैं मस्तियाँ लगता सजा ही लेंगी मुहब्बत की बस्तियाँ आँचल को उन ने ऐसे सँवारा ख़ुदा क़सम कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम मौजों के इक उफाॅं में सफ़ीना था इश्क़ का तूफ़ान के फ़ुग़ाँ में सफ़ीना था इश्क़ का लो इस को मिल गया है किनारा ख़ुदा क़सम कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम ख़ुश्बू हमारे दिल के गुलिस्ताँ में उड़ रही मदमस्त फ़ज़ा मिल के गुलिस्ताँ में उड़ रही अब मिल गया है दिल को सहारा ख़ुदा क़सम कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम हलचल हुई अजीब सी बेताब मैं हुआ फ़ुरक़त के ज़ख़्म खा के यूँँ सुरख़ाब मैं हुआ इतनी कशिश से किस ने पुकारा ख़ुदा क़सम कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम — Nityanand Vajpayee
"तन्हाई" मेरी तन्हाई को अंगार बनाया न करो या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो कितनी मुश्किल से सँभाला है अभी फिर दिल को बीती यादों में रुलाया है अभी फिर दिल को ख़्वाब मिलने का मुझे ऐसे दिखाया न करो या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो रेत तपती मेरे एहसासों की है धू-धूकर उस पे यादों की अगन जाती जिगर छू-छूकर इस क़दर दिल को मेरे आप जलाया न करो या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो खिड़कियाँ आप की राहों को निहारा करतीं आहटें आने का जब-जब भी इशारा करतीं मुझ में यूँँ ज्वार मुहब्बत का उठाया न करो या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो रोज़ कहते हो कि कल आ के मिलूँगा तुम सेे हो के दुनिया में सफल आ के मिलूँगा तुम सेे अपनी तक़दीर को इतना भी सताया न करो या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो — Nityanand Vajpayee
आप कहते कि उन्नति हुई है फैलती जा रही भुखमरी है आप कहते कि उन्नति हुई है दौर मँहगाइयों का बढ़ा है मौत का भी बिगुल बेसुरा है आर्थिक युद्ध ऐसा अनोखा हर तरफ़ दिख रहा सिर्फ़ धोखा आग सीमाओं पर भी लगी है आप कहते कि उन्नति हुई है रोग बढ़कर मिटाता जनों को बंद भी है सताता जनों को है बुरे हाल में जन सुरक्षा कम हुई राजनीतिक तितिक्षा ऑक्सीजन तलक घट रही है आप कहते कि उन्नति हुई है रोमियो के विरोधी बने तुम लैला मजनूॅं के रोधी बने तुम प्रेम प्रतिबंध तुम ने लगाया कृष्ण राधा तलक को रुलाया इतना प्रतिबन्ध कब लाज़िमी है आप कहते कि उन्नति हुई है नोट-बन्दी ने जनगण हिलाया कालाधन लौट फिर भी न आया आज नीरव व माल्या अडानी लूटते देश का माल पानी झोपडों में ग़रीबी पड़ी है आप कहते कि उन्नति हुई है सब किसानों जवानों दुकानों टपरियों गाँव के घर मकानों टैक्स भरना बहुत है ज़रूरी है विकासों में अब कुछ ही दूरी देवी उत्पाद-शुल्का खड़ी है आप कहते कि उन्नति हुई है दोगुनी आई पाते किसानों वस्तु उत्पाद देती दुकानों टैक्स भरते हुए शौर्यवानों और तलते पकौड़े जवानों सबने ख़ुद ही चुनी बे-बसी है आप कहते कि उन्नति हुई है — Nityanand Vajpayee