ख़ुदा क़सम

दिल खो गया है उन
में हमारा ख़ुदा क़सम
कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम

उल्फ़त भरी ये आँखें भी करती हैं मस्तियाँ
लगता सजा ही लेंगी मुहब्बत की बस्तियाँ
आँचल को उन ने ऐसे सँवारा ख़ुदा क़सम
कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम

मौजों के इक उफाॅं में सफ़ीना था इश्क़ का
तूफ़ान के फ़ुग़ाँ में सफ़ीना था इश्क़ का
लो इस को मिल गया है किनारा ख़ुदा क़सम
कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम

ख़ुश्बू हमारे दिल के गुलिस्ताँ में उड़ रही
मदमस्त फ़ज़ा मिल के गुलिस्ताँ में उड़ रही
अब मिल गया है दिल को सहारा ख़ुदा क़सम
कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम

हलचल हुई अजीब सी बेताब मैं हुआ
फ़ुरक़त के ज़ख़्म खा के यूँ सुरख़ाब मैं हुआ
इतनी कशिश से किस ने पुकारा ख़ुदा क़सम
कमसिन अदा बनी है इशारा ख़ुदा क़सम

— Nityanand Vajpayee

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