मुझे आप से कुछ अदावत नहीं हैमगर प्यार भी अब निहायत नहीं हैबहुत हो चुका रूठना मान जानामुझे अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं हैजिसे आपने जो है समझा यहाँ परफ़क़त झूठ है वो हक़ीक़त नहीं हैमिले 'नित्य' मुझ को जहन्नम वो अच्छाकि जन्नत की मुझ को भी आदत नहीं है— Nityanand Vajpayee