रोना धोना ये तो केवल एक कहानी होती है
अव्वल तो मैं ने अश्कों से प्यास बुझानी होती है
दिल के अंदर उन की यादों के कुछ सूखे बंजर हैं
उन
में बारिश कर के अक्सर दूब उगानी होती है
मावस के मेले में उस से मेरा मिलना ठीक नहीं
मुझ से मिल कर बेचारी की खींचातानी होती है
पूरा जीवन उन को मेरी आँखों ने जी भर देखा
उन की लौ से दिल के अंदर जोत जगानी होती है
पागल वागल कुछ भी कह लो इस से मुझ को फ़र्क नहीं
ख़ुद के जिस्म-ओ-जाँ में मुझ को आग लगानी होती है
माँ बाबू जी के क़दमों में ही बसती जन्नत वन्नत
बाक़ी तो ये गंगा जमुना केवल पानी होती है
'नित्यानन्द' किसी के बहकावे में बिल्कुल मत आना
तुम ने अपनी नाव किनारे ख़ुद ही लगानी होती है















