Meaning of

बंजर

banjar • بنجر

बंजर; ऊसर; वीरान

barren; infertile; desolate

بنجر; بانجھ; ویران

Persian

ये इनायत की ही 'अज़मत है सितमगर तुझ में
कोई बंजर सी ज़मीं फूल खिला सकती हो

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इस बंजर का तुम हल बनके
बरसोगे कब तुम जल बनके

तुम याद करो मैं निकलूँगा
परछाई से हलचल बनके

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अपने पर्वत को पाने में
बन के अंबर, सागर निकले

अब सावन बरसे जितना भी
पर तुझ बिन छत बंजर निकले

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आजकल हाल मेरा ऐसा है
किसी बंज़र जमीन जैसा है

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ज़ियादा है नमक अश्कों में मेरे
ज़मीं ये दिल की बंजर हो रही है

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इसी उम्मीद से मैं देखता हूँ रास्ता उस का
वो आएगा ज़मी बंजर में इक दिन घर उगाने को

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किसी को शिद्दत से प्यार करना फ़क़त ऐ लोगों सिखाया मैं ने
किसी की बंजर ज़मीं पे चाहत का यूँँ शजर भी लगाया मैं ने

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पानी, किरन, हवा भी मुयस्सर नहीं हुए
ये हौसला है अपना कि बंजर नहीं हुए

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मुझे मिलने को आई है बड़े दिन बा'द बेचारी
हॅंसी है खिल खिलाई है बड़े दिन बा'द बेचारी

मेरी बंजर ज़मीं पे वो बनी सरसों सुनहरी सी
भरी पूरी उग आई है बड़े दिन बा'द बेचारी

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बंजर हूँ तो बंजर ही रहने दो मुझे
तुम अब मुझे कोई गुलिस्ताँ मत करो

तंग आ चुके हैं हम तेरे इस इश्क़ से
तुम छोड़ दो हम को परेशाँ मत करो

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ये इनायत की ही 'अज़मत है सितमगर तुझ में
कोई बंजर सी ज़मीं फूल खिला सकती हो

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इस बंजर का तुम हल बनके
बरसोगे कब तुम जल बनके

तुम याद करो मैं निकलूँगा
परछाई से हलचल बनके

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'बंजर' शब्द खालीपन और वीरानी का भाव जगाता है। कविता में, यह केवल भौतिक ऊसरता नहीं बल्कि भावनात्मक या आध्यात्मिक शून्यता का भी प्रतीक है, जहाँ जीवन ठहर सा गया हो या मुरझा गया हो।

कवि अक्सर 'बंजर' का उपयोग हृदय और आत्मा के उन परिदृश्यों को चित्रित करने के लिए करते हैं, जहाँ सपने मुरझा गए हैं और आशाएँ सुप्त पड़ी हैं। यह उर्वरता और विकास की छवियों के विपरीत है, अनुपस्थिति की कठोरता को उजागर करता है।

'बंजर' की कठोर छवि हमें उन मौन स्थानों की याद दिलाती है जहाँ जीवन ठहरता है, नवीनीकरण की प्रतीक्षा में।