
बंजर हूँ तो बंजर ही रहने दो मुझे
तुम अब मुझे कोई गुलिस्ताँ मत करो
तंग आ चुके हैं हम तेरे इस इश्क़ से
तुम छोड़ दो हम को परेशाँ मत करो
— Nakul kumar
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