Varun Anand

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@varun-anand

Varun Anand shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Varun Anand's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

प्यार मेरी कमज़ोरी थी और उस ने मुझे जी भर कर कमज़ोर किया फिर छोड़ दिया — Varun Anand
न जाने कौन सी आए सदा पसंद उसे सो हम सदाएँ बदल कर सदाएँ देते रहे — Varun Anand
एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख — Varun Anand
महीनों फूल भिजवाने पड़े थे वो पहली बार जब रूठा था मुझ से — Varun Anand
तुझ को छू कर और किसी की चाह रखें हैरत है और लानत ऐसे हाथों पर — Varun Anand
ये कितनी लाशें सहेजे किसे कहाँ रक्खें कि तंग आ गई है अब ज़मीन लोगों से — Varun Anand
बड़ी जल्दी में था उस दिन ज़रा बेचैन भी था वो उसे कहना था कुछ मुझ सेे मगर वो कह नहीं पाया — Varun Anand
जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ — Varun Anand
हम पे एहसान हैं उदासी के मुस्कुराएँ तो शर्म आती है — Varun Anand
हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को हमीं को बा'द में रस्ता दिखाया जाता है — Varun Anand
मेरे क़ुबूल पे उस ने क़ुबूल कह तो दिया पर एक बार कहा उस ने तीन बार नहीं — Varun Anand
हमारी मर्ज़ी से अब क्या बदलने वाला है तुम्हारे कब्ज़े में वोटिंग मशीन है साहब — Varun Anand
उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़ — Varun Anand

Ghazal

वो जिस के पाँव में रक्खे हों काइनात के फूल क़ुबूल कैसे करेगा वो मेरे हाथ के फूल बनी भी उस की किसी से तो सिर्फ़ हम से ही उसे पसंद भी आए तो काग़ज़ात के फूल किसी का तोहफ़ा किसी और को दिया उस ने किसी को दे दिए उस ने किसी के हाथ के फूल लिए गए थे किसी सेज पर बिछाने को जनाज़ा खा गया सारे सुहागरात के फूल वो ख़ुश्बुओं का भी मज़हब निकाल लेता है उसे ये लगता है होते हैं ज़ात पात के फूल उदास लोगों को देते नहीं हैं फूल उदास सहर में देना न उस को कभी भी रात के फूल किसी ज़माने में महँगा नहीं था इश्क़ मियाँ कि चाय ढाई की आती थी साढे सात के फूल — Varun Anand
इसीलिए तो मुसाफ़िर तू सोगवार नहीं कि तू ने क़ाफ़िले देखे हैं पर गुबार नहीं नहीं ये बात नहीं है कि तुझ से प्यार नहीं मैं क्या करूँँ कि मुझे ख़ुद का ए'तिबार नहीं लगा हूँ हाथ जो तेरे तो अब सँभाल मुझे मैं एक बार ही मिलता हूँ बार-बार नहीं मुझे कुरेदने वालो मैं एक सहरा हूँ कि मुझ सेे रेत ही निकलेगी आबशार नहीं ग़मों से रिश्ता बना दोस्ती निभा इनसे दुखों को पाल मेरी जान इनको मार नहीं मिरे क़ुबूल पे उस ने क़ुबूल कह तो दिया पर एक बार कहा उस ने तीन बार नहीं जहाँ तू बिछड़ा वहाँ गीत बज रहा था यही "मिरे नसीब में ऐ दोस्त तेरा प्यार नहीं" — Varun Anand

Nazm

"उस की ख़ुशियाँ" सारी झीलें सूख गई हैं उस की आँखें सूख गई हैं पेड़ों पर पंछी भी चुप हैं उस को कोई दुख है शायद रस्ते सूने सूने हैं सब उस ने टहलना छोड़ दिया है सारी ग़ज़लें बेमानी हैं उस ने पढ़ना छोड़ दिया है वो भी हँसना भूल चुकी है गुलों ने खिलना छोड़ दिया है सावन का मौसम जारी है या'नी उस का ग़म जारी है बाक़ी मौसम टाल दिए हैं सुख कूएँ में डाल दिए हैं चाँद को छुट्टी दे दी गई है तारों को मद्धम रक्खा है आतिश-दान में फेंक दी ख़ुशियाँ दिल में बस इक ग़म रक्खा है खाना पीना छोड़ दिया है सब सेे रिश्ता तोड़ दिया है हाए क़यामत आने को है उस ने जीना छोड़ दिया है हर दिल ख़ुश हर चेहरा ख़ुश हो वो हो ख़ुश तो दुनिया ख़ुश हो वो अच्छी तो सब अच्छा है और दुनिया में क्या रक्खा है ये सब सुन कर ख़ुदा ने बोला बोल तेरी अब ख़्वाहिश क्या है मैं ने बोला मेरी ख़्वाहिश मेरी ख़्वाहिश उस की ख़ुशियाँ ख़ुदा ने बोला तेरी ख़्वाहिश मैं फिर बोला उस की ख़ुशियाँ इस के अलावा पूछ रहा हूँ मैं ने बोला उस की ख़ुशियाँ अपने लिए कुछ माँग ले पगले माँग लिया ना उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ — Varun Anand
उस से मुहब्बत झीलें क्या हैं? उस की आँखें उम्दा क्या है? उस का चेहरा ख़ुश्बू क्या है? उस की साँसें ख़ुशियाँ क्या हैं? उस का होना तो ग़म क्या है? उस सेे जुदाई सावन क्या है? उस का रोना सर्दी क्या है? उस की उदासी गर्मी क्या है? उस का ग़ुस्सा और बहारें? उस का हँसना मीठा क्या है? उस की बातें कड़वा क्या है? मेरी बातें क्या पढ़ना है? उस का लिक्खा क्या सुनना है? उस की ग़ज़लें लब की ख़्वाहिश? उस का माथा ज़ख़्म की ख़्वाहिश? उस का छूना दुनिया क्या है? इक जंगल है और तुम क्या हो? पेड़ समझ लो और वो क्या है? इक राही है क्या सोचा है? उस से मुहब्बत क्या करते हो? उस से मुहब्बत मतलब पेशा? उस से मुहब्बत इस के अलावा? उस से मुहब्बत उस सेे मुहब्बत........ — Varun Anand