तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्तमर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्तहैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आमपगला गए हैं आप के चूमें हुए दरख़्त— Varun Anand