humeen talash ke dete hain raasta sab ko | हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को

  - Varun Anand

हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को
हमीं को बा'द में रस्ता दिखाया जाता है

  - Varun Anand

Raasta Shayari

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    हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
    जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
    Bashir Badr
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    हमारे लोग अगर रास्ता न पाएँगे
    शिलाएँ जोड़ के पानी पे पुल बनाएँगे

    फिर एक बार मनेगी अवध में दीवाली
    फिर एक बार सभी रौशनी में आएँगे
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    Amit Jha Rahi
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    अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
    ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है

    ये राह-ए-इश्क़ है इसमें क़दम ऐसे ही उठते हैं
    मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
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    Abrar Kashif
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    मेरी दुनिया उजड़ गई इसमें
    तुम इसे हादसा समझते हो

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    आख़िरी रास्ता समझते हो
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    Himanshi babra KATIB
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As you were reading Shayari by Varun Anand

    ज़हीन आप के दर पर सदाएँ देते रहे
    जो ना-समझ थे वो दर-दर सदाएँ देते रहे

    न जाने कौन सी आए सदा पसंद उसे
    सो हम सदाएँ बदल कर सदाएँ देते रहे

    पलट के देखना तो उस का फ़र्ज़ बनता था
    सदाएँ फ़र्ज़ थीं जिन पर सदाएँ देते रहे

    मैं अपने जिस्म से बाहर तलाशता था उन्हें
    वो मेरे जिस्म के अंदर सदाएँ देते रहे

    हमारे अश्कों की आवाज़ सुन के दौड़ पड़े
    वो जिन की प्यास को सागर सदाएँ देते रहे

    तुम्हारी याद में फिर रत-जगा हुआ कल और
    सहर में नींद के पैकर सदाएँ देते रहे
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    Varun Anand
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    तिरे चेहरे की रौनक़ खा रहा है
    ये किसका ग़म तुझे तड़पा रहा है।

    हमारा सब्र तो पूरा रहा था
    हमारा फल मगर फीका रहा है

    मै उसका सातवाँ हूँ इश्क़ तो क्या
    वो मेरा कौनसा पहला रहा है।

    तिरा दुख है तो क्या हैं रोज़ के दुख
    नये पौदों को बरगद खा रहा है।

    बिछड़ने में मज़ा भी था सज़ा भी
    मैं अब ख़ुश हूँ तो वो पछता रहा है

    हमारे दरम्याँ उलफ़त नहीं है
    हमारे बीच समझौता रहा है

    अजाइब घर में रक्खी जाएँगी सब
    वो जिस-जिस चीज़ को छूता रहा है

    खड़ी है शाम फिर बाहें पसारे
    कोई भूला सहर का आ रहा है
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    Varun Anand
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    हमारी आँख से बरसा है ये कल रात का पानी
    समझ बैठे हो जिस को आप भी बरसात का पानी

    सताती ही नहीं उसको कभी फिर प्यास की शिद्दत
    कि जो इक बार पी लेता है उसके हाथ का पानी

    चलो अच्छा हुआ आंसू भी मेरे पी गए ये लोग
    चलो कुछ काम तो आया मेरे जज़बात का पानी

    तुम्हारे वास्ते बस नाचने गाने का मौक़ा है
    मुसीबत है हमारे वास्ते बरसात का पानी

    ये सहरा है यहाँ दरिया समंदर की ही बातें हैं
    यहाँ मतलब निकलता है सभी की बात का पानी
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    Varun Anand
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    यूँ अपनी प्यास की ख़ुद ही कहानी लिख रहे थे हम
    सुलगती रेत पे उँगली से पानी लिख रहे थे हम

    मियाँ बस मौत ही सच है वहाँ ये लिख गया कोई
    जहाँ पर ज़िंदगानी ज़िंदगानी लिख रहे थे हम

    मिले तुझ से तो दुनिया को सुहानी लिख दिया हम ने
    वगर्ना कब से उस को बे-मआ'नी लिख रहे थे हम

    हमीं पे गिर पड़ी कल रात वो दीवार रो रो कर
    कि जिस पे अपने माज़ी की कहानी लिख रहे थे हम
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    Varun Anand
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    दुनिया में और वक़्त बिताने का मन नहीं
    लेकिन ख़ुदा के पास भी जाने का मन नहीं

    बैठे हैं और ख़ाक हुए जा रहे हैं हम
    फिर भी तिरे दयार से जाने का मन नहीं

    मन कह रहा है आज हक़ीक़त करें बयाँ
    लेकिन तिरे ख़िलाफ़ भी जाने का मन नहीं

    मजबूर हो के उस से गले मिल रहे हैं हम
    वो जिससे हम को हाथ मिलाने का मन नहीं

    कर सकता हूँ मै बंद भी कश्ती का वो सुराख़
    पर आज अपनी जान बचाने का मन नहीं

    इक रोग है जो तुझको बताना नहीं कभी
    इक ज़ख़्म है जो तुझको दिखाने का मन नहीं
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    Varun Anand
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