Varun Anand

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    जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है
    उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़
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    ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है
    मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है

    दग़ा भी दूँगा प्यार में कभी कभी
    कि ये मिरा उसूल है क़ुबूल है

    तुझे जहाँ अज़ीज़ है तो छोड़ जा
    मुझे ये शय फ़ुज़ूल है क़ुबूल है

    तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं
    जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है

    लिपट ऐ शाखे गुल मगर ये सोच कर
    मेरा बदन बबूल है क़ुबूल है

    यही है गर तिरी रज़ा तो बोल फिर
    क़ुबूल है क़ुबूल है क़ुबूल है
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    Varun Anand
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    रब्त है मुझ से तिरा तो रब्त का उनवान बोल
    या मुझे अंजान कह दे या फिर अपनी जान बोल

    एक ही चेहरा नज़र में और लबों पे इक ही नाम
    और क्या होती है सच्चे इश्क़ की पहचान बोल ?

    मै अँगूठी बेच कर ले आया तेरी बालियाँ
    सूने-सूने देखता कब तक मै तेरे कान बोल

    ये मुलायम हाथ मेरे काम कब आएँगे जाँ?
    कब बिछेगा इन से मेरे घर में दस्तर-ख़्वान बोल ?

    कब मिलेगी सुब्ह तुझ से चाय की प्याली मुझे?
    कब तेरे हाथों का खाऊँगा कोई पकवान बोल ?

    कब तिरे वालिद मिरे वालिद से मिलने आएँगे?
    कब तिरी अम्मी को बोलूँगा मैं अम्मी जान बोल?

    पूछते है सब तिरा मैं कौन हूँ क्या नाम है
    बोलने का वक़्त है अब, बोल मेरी जान बोल
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    Varun Anand
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    तेरे पीछे होगी दुनिया पागल बन
    क्या बोला मैंने कुछ समझा? पागल बन

    सहरा में भी ढूँढ ले दरिया पागल बन
    वरना मर जाएगा प्यासा पागल बन

    आधा दाना आधा पागल नइँ नइँ नइँ
    उसको पाना है तो पूरा पागल बन

    दानाई दिखलाने से कुछ हासिल नही
    पागल खाना है ये दुनिया पागल बन

    देखें तुझको लोग तो पागल हो जाएँ
    इतना उम्दा इतना आला पागल बन

    लोगों से डर लगता है तो घर में बैठ
    जिगरा है तो मेरे जैसा पागल बन
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    Varun Anand
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    अपनी आँखों में भर कर ले जाने हैं
    मुझको उसके आँसू काम में लाने है

    देखो हम कोई वहशी नइँ दीवाने हैं
    तुमसे बटन खुलवाने नइँ लगवाने हैं

    हम तुम इक दूजे की सीढ़ी है जानाँ
    बाक़ी दुनिया तो साँपों के ख़ाने हैं

    पाक़ीज़ा चीज़ों को पाक़ीज़ा लिखो
    मत लिक्खो उसकी आँखें मयखाने हैं
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    Varun Anand
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    उस से मुहब्बत
    झीलें क्या हैं?
    उसकी आँखें

    उम्दा क्या है?
    उसका चेहरा

    ख़ुश्बू क्या है?
    उसकी साँसें

    खुशियाँ क्या हैं?
    उसका होना

    तो ग़म क्या है?
    उससे जुदाई

    सावन क्या है?
    उसका रोना

    सर्दी क्या है?
    उसकी उदासी

    गर्मी क्या है?
    उसका ग़ुस्सा

    और बहारें?
    उसका हँसना

    मीठा क्या है?
    उसकी बातें

    कड़वा क्या है?
    मेरी बातें

    क्या पढ़ना है?
    उसका लिक्खा

    क्या सुनना है?
    उसकी ग़ज़लें

    लब की ख़्वाहिश?
    उसका माथा

    ज़ख़्म की ख़्वाहिश?
    उसका छूना

    दुनिया क्या है?
    इक जंगल है

    और तुम क्या हो?
    पेड़ समझ लो

    और वो क्या है?
    इक राही है

    क्या सोचा है?
    उस से मुहब्बत

    क्या करते हो?
    उस से मुहब्बत

    मतलब पेशा?
    उस से मुहब्बत

    इस के अलावा?
    उस से मुहब्बत

    उससे मुहब्बत........
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    Varun Anand
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    चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़
    सारी दुनिया उसका चर्बा उसका चेहरा एक‌ तरफ़

    वो लड़कर भी सो जाए तो उसका माथा चूमूँ मैं
    उससे मुहब्बत एक तरफ़ है उससे झगड़ा एक तरफ़

    जिस शय पर वो उँगली रख दे उसको वो दिलवानी है
    उसकी ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़

    ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उसके हाथों से
    चारासाज़ी एक तरफ़ है उसका छूना एक तरफ़

    सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है
    सब का कहना एक तरफ़ है उसका कहना एक तरफ़

    उसने सारी दुनिया माँगी मैंने उसको माँगा है
    उसके सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
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    Varun Anand
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    उस ने सारी दुनिया माँगी मैंने उस को माँगा है
    उस के सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़
    Varun Anand
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    वो लड़कर भी सो जाए तो उसका माथा चूमूँ मैं
    उससे मोहब्बत एक तरफ़ है उससे झगड़ा एक तरफ़
    Varun Anand
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    देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं
    तुमसे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
    Varun Anand
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