Meaning of

जिस्म-ओ-जाँ

jism-o-jaan • جسم و جاں

शरीर और आत्मा; भौतिक और आध्यात्मिक सार

body and soul; physical and spiritual essence

جسم و روح; جسمانی اور روحانی جوہر

Persian

कई लौंडे तुम्हारे जिस्म-ओ-जाँ के
रिसर्चर होते होते रह गए हैं

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अजीब हालत है जिस्म-ओ-जाँ की हज़ार पहलू बदल रहा हूँ
वो मेरे अंदर उतर गया है मैं ख़ुद से बाहर निकल रहा हूँ

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दरमियाँ जिस्म-ओ-जां फ़ासला हो गया
नाम 'मय्यत' हर इक शख़्स का हो गया

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ये जिस्म-ओ-जाँ तुझे देकर मिरी तक़दीर लिखनी है
ज़माना बे-वफ़ाई का मुझे मौक़ा' भी देना है

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तुम्हारे दर्द से जागे तो उन की क़द्र खुली
वगरना पहले भी अपने थे जिस्म-ओ-जान वही

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बात-बात पे वा-वाह करने वाले
तुम ही हो मुझे गुमराह करने वाले

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महक जाता ये जिस्म-ओ-जाँ तुम्हारा
मोहब्बत में नहाना चाहिए था

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कर दिया हवाले अब थाम ले या ठुकरा दे
हैं थिरकते जिस्म-ओ-जाँ तेरे इश्क़ में बे-सुध

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कई लौंडे तुम्हारे जिस्म-ओ-जाँ के
रिसर्चर होते होते रह गए हैं

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अजीब हालत है जिस्म-ओ-जाँ की हज़ार पहलू बदल रहा हूँ
वो मेरे अंदर उतर गया है मैं ख़ुद से बाहर निकल रहा हूँ

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'जिस्म-ओ-जाँ' मानव अस्तित्व की द्वैतता को दर्शाता है, जहाँ भौतिक और आध्यात्मिक एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। कविता में, यह द्वैतता अक्सर जीवन के ठोस और अमूर्त पहलुओं के बीच संघर्ष और सामंजस्य को दर्शाती है।

'जिस्म-ओ-जाँ' का उपयोग कवि प्रेम, बलिदान और भौतिक और आध्यात्मिक के बीच के शाश्वत बंधन की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर लालसा और पूर्ति के संदर्भों में प्रकट होता है, जहाँ शरीर और आत्मा एकता की आकांक्षा करते हैं।

शरीर और आत्मा के नृत्य में, कविता अपनी सबसे गहरी अभिव्यक्तियाँ पाती है। 'जिस्म-ओ-जाँ' का सार सामंजस्य की शाश्वत खोज है।