तुम्हें दिल में बसाना चाहता हूँ
तुम्हारे नाज़ उठाना चाहता हूँ
हुई आमद अभी मिस्रा-ए-मौज़ूँ
इसे सानी बनाना चाहता हूँ
ग़ज़ल बन कर मेरे सीने से लग जा
मैं तेरा लुत्फ़ उठाना चाहता हूँ
बहुत दिन से हूँ मैं ख़्वाहाँ तुम्हारा
क़सम से डूब जाना चाहता हूँ
चुराया 'नित्य' जिसने दिल है मेरा
उसी पर जाँ लुटाना चाहता हूँ
— Nityanand Vajpayee















