मैं ने उन्हें बस अपना समझने की भूल की
मुश्क़िल को एक मौक़ा' समझने की भूल की
गुमराह कर रहे हैं ज़माने को नेता लोग
हम सब ने जिन को अच्छा समझने की भूल की
चोरी की लाइनों से सजाते हैं जो ग़ज़ल
हम ने उन्हें सयाना समझने की भूल की
सींची लहू से मैं ने तो जा कर कहीं खिली
तुम ने ग़ज़ल को हल्का समझने की भूल की
'उपमन्यु' मैं उधार नहीं माँगता मगर
तुम ने दुआ को पैसा समझने की भूल की
— Nityanand Vajpayee















