दहशत

सारी दुनिया में अँधेरा है जहन्नम जैसा
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा

फ़तह बंदूकों ने पाई है सर-ए-नौ देखो
सतह दहशत ने बनाई है सर-ए-नौ देखो
घर में मौतों का बसेरा है जहन्नम जैसा
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा

कौन इंसान को इंसान का दुश्मन करता
कौन बारूद बिछा लाशों पे नर्तन करता
दर्द ये किस ने बिखेरा है जहन्नम जैसा
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा

मैं ने किंदील मेरे दिल का जलाया लेकिन
कुछ अँधेरे को उजाले से मिटाया लेकिन
धुँधला धुँधला सा सवेरा है जहन्नम जैसा
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा

आज दुनिया पे हुकूमात हुए ज़ुल्मों के
क़ाबिल-ए-ग़ौर सवालात हुए ज़ुल्मों के
बढ़ता आतंक का डेरा है जहन्नम जैसा
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है जहन्नम जैसा

— Nityanand Vajpayee

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