नख़्ल-ए-मातम को नई जीत बताने वाले
कितना बद-कार है तू फ़ित्ना छुपाने वाले
हारे जरनैल को तमग़े से ये तो साबित है
तू किसी डर में है कुर्सी को बचाने वाले
बाज़ आजा तेरी ग़फ़लत में कहीं ऐसा न हो
ख़ुद ही मिट जाऍं हमें जड़ से मिटाने वाले
तू मेरा ख़ून पिए और पिए पानी भी
अब यूँ चलने का नहीं झूठा डराने वाले
मौत के सौदागरों सुन लो ख़ुदा का फ़रमान
क़हर-ए-दर्वेश से अल्लाह न बचाने वाले
— Nityanand Vajpayee















