ये दौलत ये शोहरत बहाना है सब कुछ
यहीं छोड़ कर सबने जाना है सब कुछ
ये गाड़ी ये घोड़े ये नौकर ये चाकर
किसी के नहीं काम आना है सब कुछ
किसी के मददगार गर बन सको तो
बगरना तो सबने गँवाना है सब कुछ
अता की है जिस ने ये काया ये माया
उसे वापसी पर चुकाना है सब कुछ
नहीं इस जहाँ में कोई है किसी का
फ़क़त मतलबों का फ़साना है सब कुछ
— Nityanand Vajpayee















