"तन्हाई"

मेरी तन्हाई को अंगार बनाया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो

कितनी मुश्किल से सँभाला है अभी फिर दिल को
बीती यादों में रुलाया है अभी फिर दिल को
ख़्वाब मिलने का मुझे ऐसे दिखाया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो

रेत तपती मेरे एहसासों की है धू-धूकर
उस पे यादों की अगन जाती जिगर छू-छूकर
इस क़दर दिल को मेरे आप जलाया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो

खिड़कियाँ आप की राहों को निहारा करतीं
आहटें आने का जब-जब भी इशारा करतीं
मुझ
में यूँ ज्वार मुहब्बत का उठाया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो

रोज़ कहते हो कि कल आ के मिलूँगा तुम से
हो के दुनिया में सफल आ के मिलूँगा तुम से
अपनी तक़दीर को इतना भी सताया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो

— Nityanand Vajpayee

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