"तन्हाई"
मेरी तन्हाई को अंगार बनाया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो
कितनी मुश्किल से सँभाला है अभी फिर दिल को
बीती यादों में रुलाया है अभी फिर दिल को
ख़्वाब मिलने का मुझे ऐसे दिखाया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो
रेत तपती मेरे एहसासों की है धू-धूकर
उस पे यादों की अगन जाती जिगर छू-छूकर
इस क़दर दिल को मेरे आप जलाया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो
खिड़कियाँ आप की राहों को निहारा करतीं
आहटें आने का जब-जब भी इशारा करतीं
मुझ
में यूँ ज्वार मुहब्बत का उठाया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो
रोज़ कहते हो कि कल आ के मिलूँगा तुम से
हो के दुनिया में सफल आ के मिलूँगा तुम से
अपनी तक़दीर को इतना भी सताया न करो
या तो आ जाओ या फिर याद भी आया न करो















