Meaning of

अंगार

angaar • انگار

अंगारे; चिंगारी; उग्र जुनून

embers; sparks; fiery passion

انگارے; چنگاری; شدید جذبہ

Sanskrit

"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं

कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर

खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो

रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने

एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम

आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन

वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़

इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला

लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो

भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे

मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा

याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो

ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था

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ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा
और अगर रोइए तो पानी है

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चले तो पाँव के नीचे कुचल गई कोई शय
नशे की झोंक में देखा नहीं कि दुनिया है

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पानी में गिरा अंगारा था मैं
सब कहते थे बेचारा था मैं

थी जिस तिनके के सहारे दुनिया
उस इक तिनके का सहारा था मैं

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हर जानिब हो कर आया हूँ बातें हैं बस यार वही
चर्चा उस के चहरे का या चहरे का श्रंगार वही

अच्छा सब लगता है पर दो चीज़ों का कायल हूँ मैं
खन खन तेरे कंगन की औ पायल की झंकार वही

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बात तो जब है कि अंगारों पे चल कर देखे
आरज़ू फूलों पे चलती है तो क्या चलती है

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हर मौसम माकूल समझना पड़ता है
अंगारों को फूल समझना पड़ता है

जब बढ़कर दुश्मन से टक्कर लेना हो
चट्टानों को धूल समझना पड़ता है

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ख़राबों में रईसी की गली को छोड़ना अच्छा
गले की फांँस बन जाए तो रिश्ता तोड़ना अच्छा

नहीं अच्छा अगर तुम झोंक दो तूफ़ान में कश्ती
कभी हो छेद कश्ती में अगर तो मोड़ना अच्छा

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मैं पागल तो नहीं कोई किसी के प्यार में दे दूँ
खरा सोना है दिल मेरा , इसे भंगार में दे दूँ?

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इश्क़ में ख़ुद को रहें थे झोंक जो भी
अब कफ़न में लौट कर घर जा रहें हैं

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"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं

कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर

खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो

रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने

एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम

आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन

वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़

इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला

लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो

भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे

मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा

याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो

ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था

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ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा
और अगर रोइए तो पानी है

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अंगार चमकते अंगारों की छवि उत्पन्न करता है, जो गर्मी और आग की संभावना दोनों का प्रतीक है। कविता में, यह भीतर जलने वाले तीव्र जुनून का प्रतिनिधित्व करता है, जो सृजन और विनाश दोनों में सक्षम है।

कवि अंगार का उपयोग जुनून और परिवर्तन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर शांति और शांति की छवियों के विपरीत होता है, आग की द्वैत प्रकृति को उजागर करता है।

अंगार हमें याद दिलाता है कि हर चिंगारी के भीतर गर्मी और जंगली, अनियंत्रित आग दोनों की संभावना होती है।