
"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं
कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर
खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो
रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना
वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने
एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम
आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन
वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना
वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़
इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला
लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो
भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना
वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे
मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा
याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो
ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना
वो वीर भगत बलिदानी था
— "Nadeem khan' Kaavish"















