Pandemic Shayari - Poetic Verses Reflecting Struggles and Hope

Discover a poignant collection of Pandemic Shayari that captures the emotions, challenges, and resilience during difficult times. These poetic lines reflect hope, unity, and the strength to overcome life’s adversities.

Best Pandemic Shayari on Struggles and Resilience

vabaa shayari
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
जान का रोग है बला है इश्क़
Meer Taqi Meer
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नब्ज़ देखो न अब तबीब मेरी
इश्क़ के रोग की दवा ही नहीं
Shakir Sheikh
फिल्मी विलिनो से कम थोड़ी न है ये कोरोना
गर जान से मिलने जाओ तो जान को खतरा है
Vivek Chaturvedi
दिए हैं ज़ख़्म इतने रोग भी कोई दिया होता
न रहती चाह कोई और न ज़ख़्मों को सिया होता
Sanjay Bhat
तन्हाइयों ने मुझ को बिगाड़ा है इस क़दर
कुछ एक रोग तो मेरी जाँ के क़रीब हैं
Sohil Barelvi

Heart Touching Pandemic Shayari in Hindi

गर अदीबों को अना का रोग लग जाये तो फिर
गुल मोहब्बत के अदब की शाख़ पर खिलते नहीं
Afzal Ali Afzal
मर्ज़ मुझे क्या है अब ये तुम ही जानो
नब्ज़ तुम्हारे हाथो में दे दी मैंने।
Amit Maulik
हमसे पूछा गया बतलाओ मोहब्बत क्या है
हमने झुँझला के कहा रोग है जीवन भर का
Shajar Abbas
मर्ज़ ऐसा था परिंदे का कि मरना तय ही था
पर शजर की गोद में आया तो अच्छा हो गया
Ashish Awasthi
चौदह बरस की उम्र में ये इश्क़ का मरज़
यानी तुम्हारा हाल कुछ अच्छा नहीं हैं दोस्त
Shajar Abbas

Emotional Pandemic Shayari on Loss and Hope

टेंशन से मरेगा न कोरोने से मरेगा
इक शख़्स तेरे साथ न होने से मरेगा
Idris Babar
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मर्ज़ मुझे क्या है मैं तो अच्छा हूँ जाँ
चारागर का पेशा है झूठे होना तो
Akash Panwar
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रोग लग जाए जिसे भी मोहब्बत का
यार उसका फातिहा तब पढ़ा जाए
Afzal Sultanpuri
देखो तो ख़ुश मिज़ाज शजर जैसे शख़्स को
बर्बाद कर दिया है मोहब्बत के रोग ने
Shajar Abbas
सहरा की ख़ाक छानते फिरते हैं नौजवाँ
क्या हाल कर दिया है मोहब्बत के रोग ने
Shajar Abbas

Beautiful Pandemic Shayari in Urdu

इस मरज़ से कोई बचा भी है
चारागर इश्क़ की दवा भी है
Unknown
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गले लगा के मुझे कल फ़क़ीर ने दी दुआ
ख़ुदा करे की तुम्हें इश्क़ का मरज़ न लगे
Shajar Abbas
मरज़ कौन से पाल कर के रखे
नज़र ही नज़र की दवा तो नहीं
Meenakshi Kumawat Meera
वश में ही नहीं इलाज कोई मेरा कर सके
अबके बार ये मरज़ मुझे तो मौत की लगी
Manish Yadav
तबीबों पे न हो चारा इसे वो रोग कहते हैं
अलम अंदोह रंज-ओ-ग़म मलाल-ओ-सोग कहते हैं

किसी के हिज्र में बीमार सा मालूम होता हैं
वगरना ठीक हो जाता ये ऐसा लोग कहते हैं
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Mohit Subran

Short Pandemic Shayari for Instagram Captions

भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
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कुछ तो नमक भी ज़ख़्म पे छिड़का करेंगे लोग
मेरे मरज़ का ऐसा भी चारा करेंगे लोग
Qadeer Asad
एक मुद्दत से दिल-ए-बीमार हूंँ मैं
मर्ज़ काफ़ी है मुझे बीमार हूंँ मैं
Sagar Sahab Badayuni
किसी को हो कोई भी मर्ज़ सब को कहता फिरता हूँ
श़िफा का राज़ तेरे नाम की दवा ज़रूरी है
Harsh Raj
दवा को रोक दे ऐ चारागर अब
हमारा रोग बढ़ता जा रहा है
Sohil Barelvi

Poetic Pandemic Shayari on Strength and Unity

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए
Rahat Indori
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दवा को रोक दे ऐ चारागर अब
हमारा रोग बढ़ता जा रहा है
Sohil Barelvi
मैं सुख़न वर ये मरज़ मेरे लिए था
लड़खड़ाना और नस नस लड़खड़ाना
Jugnuu Zulfiqaar
कहा उस बाप ने मुझसे न जाये ये कोरोना
शहर से लौट आये देख लो बच्चे हमारे
Shubham Seth
सब्र से काम ले रहा था मैं
और फिर मौत आ गई मुझको

मैं उसे भूलना तो चाहता था
और दिल-ए-रोग खा गई मुझको
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Afzal Sultanpuri

Pandemic Shayari on Love and Support

जानती हो कि क्या हुआ है तुम्हें
इश्क़ का रोग लग गया है तुम्हें

तुमको देखें तो देखते जाएँ
देखने का अलग मज़ा है तुम्हें
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Pravin Rai
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हो न कोई रज़्म कोई भी वबा कोई न ज़हमत
है दुआ इस साल रब हिस्से हो सबके तेरी रहमत
Abha sethi
किसी का गर सुकूँ हो तो किसी का मसअला हो तुम
दवा हो तुम, दुआ हो तुम, मरज़ हो तुम, बला हो तुम
Shashank Shekhar Pathak
कोई तो इस रोग की अब बस दवा दो
इश्क़ हैं गर ये तो फिर उसको सदा दो

चाहता हैं वो तमाशा हो तो फिर हो
आज उसको तुम जी भर के वो मज़ा दो
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Mahesh Natakwala
वा किसी दम मैं अपने लब करता
सामने उस के ऐसा कब करता

ला दवा था मरज़ मेरा फिर मैं
किस से चारागरी तलब करता
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Sumit Panchal

Thoughtful Pandemic Shayari on Life’s Challenges

भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
काश ऐसा संयोग हो जाए
दूर सारे वियोग हो जाए

प्यार में हूं, मरीज़ बन बैठा
आपको भी ये रोग हो जाए
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Sandeep Gandhi Nehal
ये ख़ुशी भी छीन ली इस कमबख़त कोरोना ने
देखते ही दौड़कर उनके गले लग जाते थे
Shayra kirti
कई मर्ज़ जो कभी लाइलाज लगते थे
सही वक़्त है उनका इलाज करने का
Saarthi Baidyanath
यहाँ मिलती नहीं इसकी दवा भी
बुरा सा मर्ज़ है ये इश्क़ का भी
Kaviraj " Madhukar"

Inspirational Pandemic Shayari for Healing and Recovery

वो जिसकी याद ने जीना मुहाल कर रखा है
उसी की आस ने मुझको सँभाल कर रखा है

सियाह रातों में साए से बातें करता है
तुम्हारे ग़म ने नया रोग पाल कर रखा है
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Harsh saxena
बाप के आगे उसका जवान बेटा मर जाए
कोरोना इससे ज्यादा दुःख और क्या देगा
Nirbhay Nishchhal
कभी मिलो तो बताएँ तुम्हे कि क्या है मुझे,
जिसे समझते हो जन्नत वही सज़ा है मुझे

मैं हर किसी को तेरे नाम से बुलाता हूँ,
बिछड़ के तुझसे अजब रोग लग गया है मुझे
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Aatish Alok
प्यार का जाम तुझे ऐसा पिलाना है मुझे
माज़ी के मर्ज़ की यादों को भुलाना है मुझे
Adarsh Anand Amola
मैं हर किसी को तेरे नाम से बुलाता हूँ
बिछड़ के तुझसे अजब रोग लग गया है मुझे
Aatish Alok

Pandemic Shayari on Gratitude and Positivity

मर्ज़ कैसे पता लग सके
जाँ मु'आलिज न हूँ मैं अभी
Akash Panwar
तुम को भी मेरा रोग न लग जाए चारागर
तो मुझ को मेरे हाल पे ही छोड़ दीजिए
shaan manral
हर तरफ़ है जफ़ा का ही आलम
इश्क़ पर आई है वबा कैसी
A R Sahil "Aleeg"
मिले इज़्तिराब-ओ-दर्द बस न लगे ये रोग तुम्हें कभी
वो रहा क़रीब सदा मिरे न बिछड़ सके न मिले कभी
Ambar
दर्द भी मेरी ख़बर अब पूछता है
मर्ज़ कितना है मुझे बीमार हूँ मैं
Sagar Sahab Badayuni