Shadab Asghar

Shadab Asghar

@Dr_Shayar

Shadab Asghar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shadab Asghar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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Sher

आप सब कुछ देख सकतें हैं अगर फिर हमारी बेबसी भी देखिए — Shadab Asghar
हम तुम्हें जान जान कहते थे जान तो सब की जानी होती है — Shadab Asghar
कोई तो हल निकालो मस अले का मुझे उन से मुहब्बत हो गई है — Shadab Asghar
अक़्लमंदों के बस की बात नहीं इश्क़ अन्धों का खेल है बेटा — Shadab Asghar
कलेंडर, दिन ,महीने साल बदले और इक मैं हूँ मुझे कल भी मुहब्बत थी, मुझे अब भी मुहब्बत है — Shadab Asghar
रफ़्ता रफ़्ता सब कुछ समझ गया हूँ मैं लोग अचानक टैरेस से क्यूँ कूद गए — Shadab Asghar
कभी कभी वो बला की हसीन लगती है कभी कभी तो उसे देखने का जी न करे — Shadab Asghar
दुआ में माँग लूँ मैं उस को लेकिन फ़क़त पाना मेरा मक़सद नहीं है — Shadab Asghar
कैसे ये मान लें तू लकीरों में नहीं है हम ने भी कह दिया है तेरा हो के रहेंगे — Shadab Asghar
बा'द में तुम से इश्क़ कर लेंगे पहले ख़ुदस तो प्यार कर लें हम — Shadab Asghar
तुझ से बिछड़ा तो मर न जाऊँ कहीं तू मुहब्बत नहीं है , आदत है — Shadab Asghar
उन आँखों पर शे'र कहे जा सकते थे उन आँखों में डूब ने से गर बच जाते — Shadab Asghar

Ghazal

ऐसे तो कहते फिरते हो बारम्बार , मुहब्बत है अब वो सामने ही बैठी है बोलो यार,मुहब्बत है सारी दुनिया जीत चुके हो बस इक दिल न जीत सके दिल को जीता जा सकता है गर हथियार ,मुहब्बत है काश कभी दिन ऐसा आए वो बस मेरे साथ में हो हाथ पकड़ के माथा चुम के हो इज़हार मुहब्बत है वो तो रूठ के सो जाती हैं घण्टों तक मैं सोता नई जितना चाहे ज़ुल्म करे वो लेकिन यार ,मुहब्बत है तू ने उस सेे इश्क़ किया था रस्ता रोक खड़ा है क्यूँ रहने दे भई, जाने भी दे, आख़िरकार, मुहब्बत है बीच भंवर में फंसा पड़ा है जाने कैसी उलझन में एक किनारे ज़िम्मेदारी और उस पार मुहब्बत है उस को देख के दिल घबराना नींद न आना बेचैनी ये कोई बीमारी नई है, राम कुमार, मुहब्बत है — Shadab Asghar
जी मेरी ज़िंदगी में कुई दुख नहीं हाँ जी मैं ने कहा तो सखी दुख नहीं जो भी अच्छा बुरा वो जो मैं ने किया फिर किसी बात का भी कभी दुख नहीं तो तुम्हें चाहिए थी ख़ुशी ही ख़ुशी तो तुम्हें लग रहा आशिक़ी दुख नहीं तू ने पूरी कहानी है देखी हुई मरने वाले बता ज़िंदगी दुख नहीं देखते हैं सभी उफ्फ वो तेरी हँसी मैं तो होता नहीं. ये कोई दुख नहीं हैं कई और दुख .......राह तकते तेरी ये मुहब्बत का दुख आख़िरी दुख नहीं कोई सुखः से रहे तो ये दुख है मेरा मेरी फहरिस्त में तो कोई दुख नहीं कुछ मेरे दुख तो हैं ख़ुद के पाले हुए तो तुम्हें क्या लगा शा'इरी दुख नहीं — Shadab Asghar
इश्क़ को दुनिया बी बाज़ार नहीं कर सकते दिल से दिल के दिल पे वार नहीं कर सकते इश्क़ में अपनी जान लगा दी और लुटा दी अब हम फिर से वैसा प्यार नहीं कर सकते उस को चाहा और चाहत पर क़ायम भीं हैं। पर अफ़सोस के हम इज़हार नहीं कर सकते। उस की ही तस्वीर समाई है आँखों में। अब हम तुम सेे आँखें चार नहीं कर सकते। इश्क़ मुहब्ब्त प्यार वफ़ा सब बीमारी है। अब हम फिर ख़ुद को बीमार नहीं कर सकते। बहरे मीर में लिक्खीं है मैं ने कुछ ग़ज़लें। बिन बहरों के हम अश'आर नहीं कर सकते।۔ इतना हक़ तो मैं ने ख़ुद को भी न दिया है मेरे प्रेम का तुम इनकार नहीं कर सकते। मेरे हाथ पे पाँव रखो और तुम निकलो ना अब हम दोनों दलदल पार नहीं कर सकते। — Shadab Asghar
वो ज़िंदगी है, वो सादगी है, वो दिल-लगी है, वो एक लड़की हमारे ख़ातिर है सारा कुछ वो,वो क्या सही है वो एक लड़की ये अच्छी सीरत, ये शा'इरी है, ये जॉ बचाने का काम भी है हमारी लाइफ़ में सब सही है जो कुछ कमी है वो एक लड़की वो एक लड़की वो एक लड़की हमारी ख़्वाहिश वो एक लड़की के बस भरी है , न सीट ख़ाली , पटी हुई है , वो एक लड़की किसी के ख़्वाबों में हम नहीं हैं ,और उस के ख़्वाबों में और कोई कोई हमारे भी ख़्वाब पूछे, बसी हुई है वो एक लड़की यक़ीन हम पर अगर नहीं हो वो ख़ुदस आ कर के ले तलाशी हमारे दिल में अगर कोई है तो ये वही है, वो एक लड़की हमारे हक़ में दुआ करो के, हमारा ख़ुशियों से राब्ता हो हैं उसकीं ख़ुशियाँ तमाम दुनियां ,मेरी ख़ुशी है वो एक लड़की हैं उस की आँखें हमारी दुनियां अर उस की सुहबत हमारी जन्नत हम एक पल में हैं, दो जहाँ में, मेरी सखी है वो एक लड़की — Shadab Asghar

Nazm

मेरी जाँ याद है तुम को मेरी जाँ याद है तुम को मेरी तुम जान थी पहले मेरी तुम जान अब भी हो मगर अब फर्क इतना है मैं तुम सेे मिल नहीं सकता मेरी जान याद है तुम को ये कुछ बातें बताता हूँ तुम्हें मैं तेरे बारे में ये कुछ बातें ज़रूरी हैं जो तुम सेे कह नहीं सकता मेरी जाँ कुछ पता भी है जभी तुम कॉलेज आती हो हवा में रंग चढ़ता है हवा भी तेज चलती है परिंदे शोर करते हैं शज़र भी बोल पड़ते है ये कलियाँ खिल सी जाती है परी जब पढ़ने आती है तुम्हारे हुस्न का आशिक़ ये सूरज शर्म के मारे कही पर छुप सा जाता है मगर अफसोस अब ये है तुम अब कालेज नहीं आती मेरी जाँ क्या बताऊँ मैं मैं तुम सेे प्यार करता हूँ मगर कहने से डरता हूँ तुम्हें समझाया था मैं ने कि मेरी जाँ फूल हो तुम तो जिसे सब खार कहते है वही अब हो गया तुम सेे जिसे सब प्यार कहते है। ये प्यार अब मिट नहीं सकता किसी के दूर जाने से मुहब्बत मर नहीं जाती उसे न देख पाने से मैं तो आशिक़ पुराना था तू मेरी जान थी पहले मेरी तुम जान अब भी हो मेरी जान याद है तुम को मेरी जाँ कुछ पता भी है तुम्हारे बिन ये दिन मेरे बड़ी मुश्किल से कटते है के जब जब तुम नहीं आतीहवाएं रुक सी जाती है के कलियाँ सूख जाती है फ़लक बे नूर होता है दीवारें चीख उठती हैं शज़र भी सुख जाते है दुकानें बंद रहतीं है फ़िज़ा गमगीन लगती है यही अब इन की किस्मत है इन्हें ऐसे ही मरने दो तुम अब कॉलेज नहीं आना तुम्हें क्या फ़र्क़ पड़ता है किसी के रोने धोने से तुम अब कालेज नहीं आना के ग़लती से भी मत आना मेरी जाँ बात मानो तुम तुम्हारे घर को जाते ही सुनोगी न्यूज़ तुम भी केये कॉलेज मर गया कब का बागीचे सुख बैठे हैं परिंदे शोक में डूबेतेरा ही नाम रटते है मेरे साथी मेरे हमदम मुहब्बत भूल बैठे हैं सभी कालेज तो आतें है पढ़ाई पर नहीं होतीं तेरे आशिक़ अब कॉलेज में तेरे पीछे नहीं आते फ़िज़ा में सौगवारी हैउदासी से अब यारी मेरी जॉ क्या बताऊँ मैं तुम्हारे दूर जाते हीअज़ब अज़ाब छाया है मेरे चारो तरफ़ अब बस तेरे ग़म का ही साया है मेरी जाँ तुम महज़ तुम हो ये कॉलेज भी तेरा कॉलेज मगर तेरे ही होने से यहाँ पर जान बाकी है मेरी जॉ बख्श दो इनकोदवा ए दीद दे दो तुम बचा लो इनको मरने से तुम्हीं हो जो बचा लोगी कोई प्यारी दवा देकर ये सब कुछ ठीक कर दो तुम मेरी जाँ बात सुन भी लोचली आओ चली आओ के बारिश की घटा बनकर कभी कोई दुआ बनकर सीखा दो फूल को खिलना सिखा शाम को ढलना हवा में रंग भर दो तुम उदासी भंग कर दो तुम तेरे होने से कॉलेज में ज़रा सी जान बाकी है ये भी इंसाफ करदो तुम मेरी जाँ माफ कर दो तुम चली आओ चली आओ कभी कोई हवा बनकर मेरी जॉ याद है तुमकोमेरी तुम जान थी पहले मेरी तुम जान अब भी हो मगर बस फ़र्क़ इतना है मैं तुम सेे मिल नहीं सकता॥ — Shadab Asghar