मैं जिन के सामने झुकता नहीं हूँ
मैं उन के वास्ते अच्छा नहीं हूँ
ज़रा आओ कभी हम से पूछो
मैं कैसा हूँ भला कैसा नहीं हूँ
समुंदर से लड़ाई चल रही है
अभी मैं वाकई डूबा नहीं हूँ
किसी से हंस के मिलना भी सितम है
उसे लगता है मैं उस का नहीं हूँ
ज़माने भर के लड़कों की तरह मैं
मैं कोशिश भी करूँ होता नहीं हूँ
उदासी चेहरे पर घर कर गई है
मैं चाहे ख़ुश रहूँ लगता नहीं हूँ
तुम्हें आगे भी पढ़ना चाहिए था
मैं लड़की हूँ न सर लड़का नहीं हूँ
— Shadab Asghar















