मेरी जाँ याद है तुम को

मेरी जाँ याद है तुम को मेरी तुम जान थी पहले
मेरी तुम जान अब भी हो मगर अब फर्क इतना है
मैं तुम से मिल नहीं सकता
मेरी जान याद है तुम को

ये कुछ बातें बताता हूँ तुम्हें मैं तेरे बारे में
ये कुछ बातें ज़रूरी हैं जो तुम से कह नहीं सकता

मेरी जाँ कुछ पता भी है जभी तुम कॉलेज आती हो
हवा में रंग चढ़ता है
हवा भी तेज चलती है
परिंदे शोर करते हैं शज़र भी बोल पड़ते है
ये कलियाँ खिल सी जाती है परी जब पढ़ने आती है
तुम्हारे हुस्न का आशिक़ ये सूरज शर्म के मारे
कही पर छुप सा जाता है मगर अफसोस अब ये है
तुम अब कालेज नहीं आती

मेरी जाँ क्या बताऊँ मैं
मैं तुम से प्यार करता हूँ मगर कहने से डरता हूँ
तुम्हें समझाया था मैं ने कि मेरी जाँ फूल हो तुम तो
जिसे सब खार कहते है
वही अब हो गया तुम से जिसे सब प्यार कहते है।

ये प्यार अब मिट नहीं सकता किसी के दूर जाने से
मुहब्बत मर नहीं जाती उसे न देख पाने से
मैं तो आशिक़ पुराना था तू मेरी जान थी पहले
मेरी तुम जान अब भी हो मेरी जान याद है तुम को

मेरी जाँ कुछ पता भी है
तुम्हारे बिन ये दिन मेरे बड़ी मुश्किल से कटते है
के जब जब तुम नहीं आतीहवाएं रुक सी जाती है
के कलियाँ सूख जाती है
फ़लक बे नूर होता है दीवारें चीख उठती हैं
शज़र भी सुख जाते है दुकानें बंद रहतीं है
फ़िज़ा गमगीन लगती है
यही अब इन की किस्मत है इन्हें ऐसे ही मरने दो
तुम अब कॉलेज नहीं आना
तुम्हें क्या फ़र्क़ पड़ता है किसी के रोने धोने से
तुम अब कालेज नहीं आना के ग़लती से भी मत आना

मेरी जाँ बात मानो तुम तुम्हारे घर को जाते ही
सुनोगी न्यूज़ तुम भी केये कॉलेज मर गया कब का
बागीचे सुख बैठे हैं
परिंदे शोक में डूबेतेरा ही नाम रटते है
मेरे साथी मेरे हमदम मुहब्बत भूल बैठे हैं
सभी कालेज तो आतें है पढ़ाई पर नहीं होतीं
तेरे  आशिक़ अब कॉलेज
में तेरे पीछे नहीं आते
फ़िज़ा में सौगवारी हैउदासी से अब यारी
मेरी जॉ क्या बताऊँ मैं
तुम्हारे दूर जाते हीअज़ब अज़ाब छाया है
मेरे चारो तरफ़ अब बस तेरे ग़म का ही साया है

मेरी जाँ तुम महज़ तुम हो ये कॉलेज भी तेरा कॉलेज
मगर तेरे ही होने से यहाँ पर जान बाकी है
मेरी जॉ बख्श दो इनकोदवा ए दीद दे दो तुम
बचा लो इनको मरने से तुम्हीं हो जो बचा लोगी
कोई प्यारी दवा देकर ये सब कुछ ठीक कर दो तुम
मेरी जाँ बात सुन भी लोचली आओ चली आओ
के बारिश की घटा बनकर कभी कोई दुआ बनकर
सीखा दो फूल को खिलना सिखा शाम को ढलना
हवा में रंग भर दो तुम उदासी भंग कर दो तुम
तेरे होने से कॉलेज में ज़रा सी जान बाकी है
ये भी इंसाफ करदो तुम मेरी जाँ माफ कर दो तुम
चली आओ चली आओ कभी कोई हवा बनकर

मेरी जॉ याद है तुमकोमेरी तुम जान थी पहले
मेरी तुम जान अब भी हो
मगर बस फ़र्क़ इतना है मैं तुम से मिल नहीं सकता॥

— Shadab Asghar

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