Abdulla Asif

Abdulla Asif

@asifabdullaasif11

Abdulla asif Asif shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abdulla asif Asif's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
इक मसीहा जन्म लेने जा रहा है
मरयमों के हाथ काटे जा रहे हैं
Abdulla Asif
सम्त-ए-पंजुम में तू छुपा है कहीं
शौक़-ए-दीदार से भरे हम लोग
Abdulla Asif
उन से दोज़ख़ में पूछ बैठा हूँ
शैख़ जी आप और यहाँ कैसे
Abdulla Asif
मेरे ख़ुदा ने कहा था मुझसे हरीफ़-ए-जाँ से भी इश्क़ करना
सो बात मानी ख़ुदा की मैंने ख़ुद अपना दीवाना बन गया हूँ
Abdulla Asif
दरिया के इस तरफ़ से रवाना किया उसे
दरिया के उस तरफ़ उसे लेने पहुँच गए
Abdulla Asif
इतना कमज़ोर है मेरा दुश्मन
उस से डरने में शर्म आती है

इतनी आसान हों सज़ाएँ तो
जुर्म करने में शर्म आती है
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Abdulla Asif
इब्लीस डर गया मैं तेरे साथ जो हुआ
मेरे भी कुछ सवाल थे अल्लाह के लिए

दरिया किनारे हैं खड़े बेड़े बड़े बड़े
पानी ही पानी बीच में मल्लाह के लिए
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Abdulla Asif
मेरे पैरों में चुभ रहा था कुछ
मैंने दुनिया निकाल फेंकी है
Abdulla Asif
देखे दुनिया पंछी का ज़र्फ
सय्यादी निगरान किया है

जितनी है औक़ात तुम्हारी
ऐसों को दरबान किया है
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Abdulla Asif
दो चार लोग घर के अगर मेरे छोड़ दो
बाक़ी किसी की आँख में जँचता नहीं हूँ मैं

कब से हूँ मुंतज़िर वो मेरा हाल पूछ लें
और मुस्कुरा के मैं कहूँ अच्छा नहीं हूँ मैं
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Abdulla Asif
तेरी तरतीब-ओ-तवाज़ुन में ख़लल मुझसे है दुनिया
तुझको तरतीब में लाऍंगे मिटाते हुए ख़ुदको

मेरा अंदाज़-ए-तफ़व्वुक़ है अनोखा भी अजब भी
देखना चाहूँ मैं मीज़ान पे ढलते हुए ख़ुदको
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Abdulla Asif
घरों से दूर रहने में बस इतनी ही मुसीबत है
किसी की याद आएगी किसी को याद आओगे
Abdulla Asif
हमारा साथ ज़रा सोच-वोच कर देना
हमारी किससे अदावत है जानते भी हो

ज़रूरतों में किसी के भी काम आ जाना
अलग तरह की इबादत है जानते भी हो
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Abdulla Asif
चल रही हैं नसीब पर बातें
बद-नसीबी से हम हैं मजमे में

आप तो बोलते नहीं थे सच
आप क्या कर रहे हैं पिंजरे में
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Abdulla Asif
उदास रहने की मिलने लगी हमें उजरत
अमीर लोगों में हम भी शुमार होने लगे
Abdulla Asif
बे-ख़ता को सता रहे हैं दोस्त
साथ देने में शर्म आती है

मेरे शजरे का मसअला है मियाँ
पाप करने में शर्म आती है
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Abdulla Asif
फ़िरदौस मसअला है नहीं तो ये आदमी
वो पाप करते जिनका तसव्वुर हराम है
Abdulla Asif
जन्नत से तो वैसे भी तअल्लुक़ नहीं कोई
अल्लाह जहन्नम को मेरे शर से बचाए
Abdulla Asif
ये ऐसा शेर है जिसको बहुत ही कम सुनाता हूँ
यही वो शेर है हाँ हाँ यही है हो गया है शेर
Abdulla Asif
तेरे कमरे की उदासी की अगर मानूँ तो
तेरे कमरे में मेरे बाद भी आया था कोई

चीख़ चिल्लाके बताता था की मैं हूँ मैं हूँ
न कोई देखता था और न सुनता था कोई
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Abdulla Asif

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