दो चार लोग घर के अगर मेरे छोड़ दोबाक़ी किसी की आँख में जँचता नहीं हूँ मैंकब से हूँ मुंतज़िर वो मेरा हाल पूछ लेंऔर मुस्कुरा के मैं कहूँ अच्छा नहीं हूँ मैं— Abdulla Asif