कौन भरोसा करता है
'आसिफ़' अच्छा लड़का है
आग लगा दो दरिया को
मेरा दुश्मन प्यासा है
ख़ून बहा दो मिट्टी का
इसने अमृत बोया है
मेरा दुश्मन है आगे
मेरे आगे शीशा है
राजा ताज पलट कर देख
बिल्कुल काँसा लगता है
बाहर बाहर हैं ख़ुशियाँ
अंदर अंदर रोना है
जाने को तैयार है बस
कोई बिछड़ने वाला है
मुफ़्ती जन्नत देखेगा
जा आगे मय-ख़ाना है
मेरा भरोसा कर मैं ने
सच में झूठ ही बोला है
— Abdulla Asif















