Waseem Nadir

Waseem Nadir

@wasim-nadir

Wasim Nadir shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Wasim Nadir's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तेरे बग़ैर भी कहती है मुझ से जीने को ये ज़िंदगी भी सही मशवरा नहीं देती — Waseem Nadir
बस एक रस्म-ए-तअल्लुक़ निभाने बैठे हैं वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं — Waseem Nadir

Ghazal

सलीक़े से अगर तोड़ें तो काँटे टूट जाते हैं मगर अफ़्सोस ये है फूल पहले टूट जाते हैं मोहब्बत बोझ बन कर ही भले रहती हो काँधों पर मगर ये बोझ हटता है तो काँधे टूट जाते हैं बिछड़ कर आप से ये तजरबा हो ही गया आख़िर मैं अक्सर सोचता था लोग कैसे टूट जाते हैं मिरी औक़ात ही क्या है मैं इक नन्हा सा आँसू हूँ बुलंदी से तो गिर कर अच्छे अच्छे टूट जाते हैं बहुत दिन मस्लहत की क़ैद में रहते नहीं जज़्बे मोहब्बत जब सदा देती है पिंजरे टूट जाते हैं ज़ियादा कामयाबी भी बहुत नुक़सान देती है फलों का बोझ बढ़ने से भी पौधे टूट जाते हैं सितम ये है मैं उस रस्ते पे नंगे पैर चलता हूँ जहाँ चलते हुए लोगों के जूते टूट जाते हैं — Waseem Nadir